भोपाल | मध्य प्रदेश विधानसभा
मध्य प्रदेश विधानसभा में “औकात” शब्द को लेकर मचे सियासी बवाल के बीच अब बयानबाज़ी और तीखी हो गई है। नेता प्रतिपक्ष को सदन में “औकात में रहने” की हिदायत देने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री की माफी के बाद भी अपने तेवर नरम नहीं किए।
सदन में विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्थिति को संभालते हुए खेद जताया था, लेकिन कैलाश विजयवर्गीय ने मीडिया से बातचीत में पूरे मामले को हल्का बताते हुए कहा — “कई बार हो जाता है यार… बहुत सामान्य सी बात है… जो वह कह रहे हैं तो उनका अपना अंदाज़ है यार…”
उन्होंने आगे कहा, “कभी-कभी गुस्सा आ जाता है यार… कप्तान हैं मुख्यमंत्री… मुख्यमंत्री ने यदि माफी मांगी तो क्या हो गया यार…”
जब पत्रकारों ने सवाल किया कि क्या पिछले डेढ़ महीने से उनकी जुबान पर “शनि” बैठा हुआ है, तो उन्होंने हंसते हुए जवाब दिया — “किसी ज्योतिष से पूछूंगा यार।”
इस बयान ने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष का आरोप है कि यह केवल शब्दों की चूक नहीं, बल्कि सत्ता के अहंकार का संकेत है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सदन की गरिमा और लोकतांत्रिक मर्यादा का सवाल है, जिसे “सामान्य बात” कहकर टाला नहीं जा सकता।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री द्वारा माफी मांगने के बावजूद यदि संबंधित मंत्री अपने बयान को हल्के अंदाज़ में लेते हैं, तो इससे सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी पर सवाल खड़े होते हैं।
विधानसभा के भीतर शुरू हुआ यह विवाद अब मीडिया और जनता के बीच चर्चा का विषय बन चुका है। साफ है कि “औकात” शब्द पर छिड़ा यह संग्राम अभी थमने वाला नहीं है।










