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एमपी के 374 निकायों में 1,134 करोड़ की खरीद में बड़ा घोटाला : 5 रुपये का फिनाइल 33,500 में खरीदा, 250 करोड़ की चपत

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ब्यूरो रिपोर्ट — भोपाल

मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों से भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सीधे तौर पर शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली और सरकारी तंत्र की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े करती है।

राज्य के 374 नगरीय निकायों में पिछले तीन वर्षों के दौरान हुई 1,134 करोड़ रुपये की सरकारी खरीद का विश्लेषण हैरान करने वाला है। सूत्रों के मुताबिक, सरकारी फाइलों में चकाचौंध और विकास के दावों के पीछे किस हद तक अंधेरगर्दी मची हुई है, इसका अंदाजा सिर्फ दो वस्तुओं के खरीद आंकड़ों से लगाया जा सकता है।

एक तरफ जहां एक निकाय में फिनाइल महज 5 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा गया, वहीं सागर जिले के बड़ोदिया कलां में इसकी कीमत कागजों पर 33,500 रुपये प्रति लीटर तक दर्ज होने का गंभीर दावा सामने आया है। इसी तरह, आम उपयोग की 60 वॉट की एलईडी लाइट कहीं 306 रुपये में आई, तो कहीं उसी लाइट के लिए 11,800 रुपये तक चुकाए जाने का मामला सामने आया है। स्थिति यह है कि कचरा उठाने वाली गाड़ियों से लेकर स्ट्रीट लाइट तक की खरीद में कीमतों का यह अंतर किसी को भी सकते में डालने के लिए काफी है।

विशेषज्ञों और अधिकारियों के विश्लेषण के अनुसार, यदि यह पूरी खरीद बाजार की औसत और वाजिब दरों पर की जाती, तो जनता के टैक्स के करीब 250 करोड़ रुपये बचाए जा सकते थे। यह भारी-भरकम रकम सीधे तौर पर सिस्टम की लापरवाही और मिलीभगत की भेंट चढ़ती नजर आ रही है।

मामले के तूल पकड़ने के बाद अब सियासत और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप है। राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि एसीएस संजय दुबे के वीडियो में सामने आए इन तमाम तथ्यों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी और इस वित्तीय अनियमितता के लिए जो कोई भी जिम्मेदार होगा, उस पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, इन सनसनीखेज आंकड़ों और खरीद दरों से जुड़े भ्रष्टाचार के इन आरोपों की औपचारिक जांच के निष्कर्ष आने अभी बाकी हैं, लेकिन इस खुलासे ने सरकार के वित्तीय प्रबंधन और खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न जरूर लगा दिया है।

Tahalka Bharat
Author: Tahalka Bharat

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