गुरु भक्ति से ही ईश्वर की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त: जया देवी जी

मनावर। श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान एवं रुद्र महायज्ञ के चतुर्थ दिवस व्यास पीठ से कथा वाचिका जया देवी जी ने गुरु महिमा, गृहस्थ जीवन और प्रभु भक्ति का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि गुरु के मार्गदर्शन के बिना ईश्वर की प्राप्ति कठिन है। गुरु दत्तात्रेय ने भी 24 गुरुओं से शिक्षा प्राप्त की थी और संसार की विभिन्न परिस्थितियों एवं जीवों से ज्ञान अर्जित किया।

जया देवी जी ने कहा कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए गृहस्थ जीवन छोड़ना आवश्यक नहीं है। मन में सच्चा प्रेम और भक्ति हो तो गृहस्थ आश्रम में रहते हुए भी मोक्ष की प्राप्ति संभव है। उन्होंने कहा कि धन से प्राप्त ज्ञान और दिखावे की भक्ति से भगवान नहीं मिलते, इसके लिए मन का निर्मल होना जरूरी है। प्रभु का नाम भी सच्चे प्रेम और भाव से लेना चाहिए।
कथा के दौरान राजा परीक्षित और सुखदेव जी महाराज के प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि ऋषि के श्राप के कारण राजा परीक्षित को सात दिन बाद तक्षक नाग के डसने से मृत्यु का वरदान मिला था। मृत्यु निश्चित जानकर राजा परीक्षित ने अपना पूरा मन श्रीमद्भागवत कथा में लगा दिया और भगवान की भक्ति में भावविभोर हो गए।
पितृ पक्ष के पावन अवसर पर वेदांत दर्शन सेवा समिति के तत्वावधान एवं वरिष्ठ हिंदू नागरिक महासंघ के सहयोग से महाभागवत पुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर वरिष्ठ हिंदू नागरिक संगठन की ओर से रामेश्वर पाटीदार, टीकाराम राय, कैलाश शर्मा एवं जगदीश पाटीदार ने कथा वाचिका जया देवी जी का स्वागत कर आशीर्वाद प्राप्त किया।










