
नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने फिलीस्तीन मुद्दे पर केंद्र सरकार की चुप्पी और रुख की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि भारत को इस मामले में नेतृत्व का परिचय देना चाहिए, न कि मानवता और नैतिकता से किनारा करना चाहिए…!
‘एक समाचार पत्र’ में लिखे अपने लेख में सोनिया ने आरोप लगाया कि सरकार की विदेश नीति भारत के संवैधानिक मूल्यों या सामरिक हितों पर आधारित नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू की व्यक्तिगत मित्रता से प्रभावित है…!
सोनिया ने याद दिलाया कि भारत ने 1988 में फिलीस्तीनी राष्ट्र को मान्यता दी थी और आज संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से 150 से अधिक ऐसा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा वैश्विक मानवाधिकार और स्वतंत्रता के संघर्षों में अग्रणी रहा है—चाहे वह दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद हो, अल्जीरियाई स्वतंत्रता संग्राम या 1971 का बांग्लादेश मुक्ति आंदोलन….!
सोनिया गांधी ने मोदी सरकार से अपील की कि भारत की विदेश नीति को व्यक्तिगत कूटनीति नहीं, बल्कि उसके ऐतिहासिक मूल्यों और मानवीय दृष्टिकोण से संचालित होना चाहिए…!










