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विकास कार्यक्रम नौकरशाही के चंगुल से बाहर कैसे निकलेगा?

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बलवंत राय मेहता की जयंती पर पंचायत प्रतिनिधियों ने उठाई सशक्तिकरण की मांग

भोपाल। मध्यप्रदेश के उमरिया जिले के ताला स्थित टाइगर हॉल रिसॉर्ट, बांधवगढ़ में आयोजित समारोह में त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के सशक्तिकरण को लेकर गंभीर मंथन हुआ। अवसर था अमर शहीद बलवंत राय मेहता के 127वें जन्मदिवस का। कार्यक्रम में ऑल इंडिया पंचायत परिषद के मुख्य महामंत्री एवं बलवंत राय मेहता पंचायती राज फाउंडेशन के न्यासी-सचिव श्री शीतला शंकर विजय मिश्र ने विकास कार्यक्रमों पर नौकरशाही के वर्चस्व को लेकर तीखी टिप्पणी की।

“पंचायतों को अधिकार नहीं, नियंत्रण ज्यादा”

मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि देश के अधिकांश राज्यों में विकास योजनाएं अभी भी नौकरशाही के नियंत्रण में संचालित हो रही हैं। अंतिम निर्णय सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की इच्छा पर निर्भर है, जबकि पंचायती राज व्यवस्था का मूल उद्देश्य स्थानीय स्वशासन को मजबूत करना था। उन्होंने कहा कि पंचायती राज अधिनियम की कई धाराएं ऐसी हैं जो पंचायतों और उनके निर्वाचित प्रतिनिधियों पर पूर्ण नियंत्रण बनाए रखती हैं, जिससे “अपनी सरकार” की अवधारणा कमजोर पड़ रही है।

उन्होंने जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर पर कार्यरत त्रिस्तरीय पंचायतों के बीच तालमेल की कमी, अधिनियमों में अस्पष्टता और व्यवहारिक विसंगतियों को पंचायती राज के प्रवाह में बाधा बताया। उनका कहना था कि यदि वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार वास्तविक रूप से पंचायतों को सौंपे जाएं, तभी यह अमर शहीद बलवंत राय मेहता को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

पंचायत परिषद का संघर्ष जारी

कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्यप्रदेश राज्य पंचायत परिषद के अध्यक्ष अशोक सिंह सेंगर ने की। उन्होंने कहा कि परिषद वर्षों से बलवंत राय मेहता की भावनाओं के अनुरूप पंचायतों के अधिकारों के लिए संघर्षरत है। उन्होंने उल्लेख किया कि मुख्यमंत्री ने भोपाल के जमूरी मैदान में आयोजित परिषद कार्यक्रम में सरपंचों को 50 हजार रुपये की स्वेच्छा निधि देने की घोषणा की थी। परिषद इस घोषणा के क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है और उम्मीद है कि बजट में इसका प्रावधान किया जाएगा।

सेंगर ने यह भी कहा कि प्रदेश में अनेक सरपंच संघों और जनपद अध्यक्ष संघों के कारण त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था की स्थिति अस्थिर हुई है। उन्होंने सभी संगठनों से अपील की कि वे मध्यप्रदेश राज्य पंचायत परिषद के नेतृत्व में एकजुट होकर पंचायतों के स्वाभिमान और अधिकारों की लड़ाई को मजबूत करें।

बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों की सहभागिता

समारोह में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए जिला पंचायत सदस्य, जनपद अध्यक्ष, जनपद सदस्य, सरपंच और पंच बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। अमर शहीद बलवंत राय मेहता के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मंच संचालन अश्वनी सिंह परिहार (सीधी) ने किया।

कार्यक्रम ने एक बार फिर यह प्रश्न प्रमुखता से उठाया—क्या विकास कार्यक्रमों को वास्तव में जनप्रतिनिधियों के माध्यम से संचालित किया जाएगा, या वे नौकरशाही के नियंत्रण में ही रहेंगे? पंचायत प्रतिनिधियों का मानना है कि जब तक वित्तीय, प्रशासनिक और नीतिगत अधिकारों का वास्तविक विकेंद्रीकरण नहीं होगा, तब तक गांवों में स्वशासन की परिकल्पना अधूरी ही रहेगी।

Tahalka Bharat
Author: Tahalka Bharat

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