पंचायती राज की बिसात : म.प्र. राज्य पंचायत परिषद की नई ‘जंग’ का ऐलान, सत्ता के गलियारों में हलचल…!
भोपाल। मध्यप्रदेश में जमीनी लोकतंत्र और ग्रामीण विकास के दावों के बीच मध्यप्रदेश राज्य पंचायत परिषद (संबद्ध अखिल भारतीय पंचायत परिषद, दिल्ली) ने अपनी नई ‘रणनीतिक’ कार्यकारिणी का गठन कर दिया है। इसे महज एक समिति कहना भूल होगी; यह दरअसल ग्रामीण अधिकारों की रक्षा और व्यवस्था में पैठ बनाने के लिए तैयार की गई एक भारी-भरकम ‘सैनिक टुकड़ी’ जैसी नजर आ रही है।
सेंगर के हाथों में कमान : क्या लौटेगी पंचायतों की पुरानी साख?
संगठन की बागडोर उमरिया के अशोक सिंह सेंगर को सौंपी गई है। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति इस बात का सीधा संकेत है कि परिषद अब केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी। सेंगर के सामने सबसे बड़ी चुनौती पंचायतों में बढ़ती नौकरशाही की दखलंदाजी को लगाम लगाने और ‘जनभागीदारी’ के खोखले वादों में जान फूंकने की होगी।
क्षेत्रीय संतुलन या सियासी बिसात?
परिषद ने कार्यकारिणी में ‘महासमर’ की तैयारी करते हुए पूरे प्रदेश को मथ दिया है। उपाध्यक्ष से लेकर मंत्री पद तक, विंध्य से लेकर महाकौशल और मालवा से लेकर चंबल तक के चेहरों को शामिल किया गया है।
उपाध्यक्षों की फौज: विनोद त्रिपाठी (रायसेन), पुष्पेंद्र देशमुख (बालाघाट) और अल्का शर्मा (नर्मदापुरम) जैसे चेहरों को उतारकर हर संभाग को साधने की कोशिश की गई है।
महामंत्री की ‘स्ट्राइक फोर्स’: शैलेन्द्र सिंह रावत (शिवपुरी) और जितेंद्र रहांगडाले (सिवनी) सहित 6 महामंत्रियों की नियुक्ति बताती है कि परिषद धरातल पर एक बड़ा नेटवर्क खड़ा करने के मूड में है।
खजाने पर नजर: राजेश पटेल (सिवनी) को कोषाध्यक्ष और राजेंद्र दुवे (इंदौर) को सह-कोषाध्यक्ष बनाकर वित्तीय प्रबंधन को भी मजबूती दी गई है।
प्रवक्ताओं की तीखी धार और मीडिया का मोर्चा
संगठन ने अपनी बात को जनता और सरकार के कानों तक ‘चीखकर’ पहुँचाने के लिए रिया दुवे (कटनी) और अश्वनी सिंह परिहार (सीधी) जैसे 5 प्रवक्ताओं की नियुक्ति की है। वहीं, मीडिया प्रभाग की कमान मनोज द्विवेदी (अनूपपुर) को देकर यह साफ कर दिया गया है कि अब पंचायतों की अनदेखी करना मुख्यधारा के मीडिया के लिए भी मुश्किल होगा।
‘दिग्गजों’ का जमावड़ा
सबसे चौंकाने वाला और प्रभावी कदम है जालम सिंह पटेल (प्रदेश अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष संघ) और अजय गोटिया (प्रदेश अध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य संघ) जैसे कद्दावर नेताओं को ‘विशेष आमंत्रित’ के रूप में जोड़ना। यह कदम परिषद को पंचायतों का एकमात्र ‘शक्ति केंद्र’ बनाने की दिशा में देखा जा रहा है।
परिषद के पदाधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यह नई कार्यकारिणी केवल बैठकों के लिए नहीं बनी है। इनका एकमात्र लक्ष्य पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों पर होने वाले हमलों को रोकना और ग्रामीण विकास की फाइलों पर जमी ‘धूल’ को झाड़ना है।










