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एमपी बीजेपी में ‘देब फॉर्मूला’! दिखावे पर ब्रेक, संगठन सर्वोपरि अनुशासन होगा पहली प्राथमिकता

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एमपी बीजेपी में अब चलेगा ‘अनुशासन का फॉर्मूला’!

बिप्लब देब के संकेतों से संगठन में बदलाव की आहट, दिखावे से ज्यादा संगठन और कार्यकर्ता पर जोर

 

भोपाल। मध्यप्रदेश भाजपा में नए प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब की एंट्री के साथ संगठन के कामकाज के तौर-तरीकों में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, देब ने शुरुआती बैठकों में संगठन को लेकर कुछ स्पष्ट प्राथमिकताएं सामने रखी हैं। हालांकि इन संकेतों के आधार पर अभी किसी बड़े संगठनात्मक फैसले की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

 

देब के संदेशों में गुटबाजी और आपसी मनमुटाव को खत्म करने, संगठन में अनुशासन बढ़ाने और कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिखाई दे रहा है। हालिया बैठकों में नेताओं के बीच संवाद और सत्ता-संगठन के बेहतर समन्वय की बात भी सामने आई है।

 

सूत्रों के मुताबिक ये हो सकते हैं नए ‘फॉर्मूले’

 

1. दिग्गजों का मनमुटाव नहीं चलेगा

वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद सार्वजनिक होने के बजाय संगठन के भीतर बातचीत से सुलझाने पर जोर।

 

2. परिवारवाद पर सख्ती

संगठन में व्यक्तिगत या पारिवारिक प्रभाव के बजाय पार्टी की संगठनात्मक व्यवस्था और कार्यकर्ता को प्राथमिकता देने का संदेश।

 

3. छोटा-बड़ा नहीं, संगठन सबसे ऊपर

पद और कद से अलग हर कार्यकर्ता को संगठन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानने की दिशा।

 

4. कोर ग्रुप और संगठनात्मक ढांचे में बदलाव के संकेत

नई टीम और संगठनात्मक स्तर पर जिम्मेदारियों को अधिक प्रभावी बनाने की कवायद पर नजर।

 

5. सार्वजनिक नाराजगी पर लगाम

नेताओं की नाराजगी या आपसी मतभेद सार्वजनिक मंचों पर सामने आने के बजाय संगठन के स्तर पर सुलझाने की अपेक्षा।

 

6. विपक्ष को आक्रामक जवाब

पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को विपक्ष के मुद्दों पर अधिक सक्रिय और प्रभावी राजनीतिक जवाब देने की दिशा में काम करने का संदेश।

 

7. कार्यकर्ता सर्वोपरि

संगठन में यह संदेश प्रमुखता से उभर रहा है कि कोई भी व्यक्ति संगठन से बड़ा नहीं है। बूथ और जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद पर भी जोर दिया जा रहा है।

 

8. अनुशासन से समझौता नहीं

पार्टी कार्यक्रमों और संगठनात्मक जिम्मेदारियों में अनुशासन को प्राथमिकता देने का संकेत।

 

9. स्वागत में दिखावा कम करने का संदेश

जेसीबी से पुष्पवर्षा, बड़ी-बड़ी मालाओं और अत्यधिक होर्डिंग-बैनर जैसी स्वागत संस्कृति को कम करने की बात सामने आई है। इसके बजाय सरकारी योजनाओं और संगठन के काम को प्रचार में प्रमुखता देने पर जोर बताया गया है।

 

अब नजर इस बात पर कि आगे क्या बदलेगा

 

बिप्लब देब को मध्यप्रदेश का नया प्रभारी बनाए जाने के साथ ही भाजपा ने संगठन में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। उनके साथ रेखा वर्मा को सह प्रभारी और चंद्रशेखर को प्रदेश महामंत्री संगठन की जिम्मेदारी दी गई है।

 

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये शुरुआती संकेत आने वाले दिनों में बड़े संगठनात्मक फैसलों में बदलेंगे? कौन से चेहरे नई जिम्मेदारियों में आएंगे, किन तौर-तरीकों पर रोक लगेगी और संगठन में क्या नया ढांचा दिखाई देगा—इसका जवाब आने वाले समय में सामने आएगा।

 

फिलहाल इतना साफ है कि मध्यप्रदेश भाजपा में नए प्रभारी की कार्यशैली ने संगठन के भीतर बदलाव की चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है।

Tahalka Bharat
Author: Tahalka Bharat

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