“सर्वस्पर्शी” या सियासी संतुलन? बजट से पहले जगदीश देवड़ा के बड़े दावे
भोपाल। प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने आगामी बजट को “सर्वस्पर्शी और जनआकांक्षाओं पर आधारित” बताते हुए बड़ा दावा किया है कि यह बजट हर वर्ग को साधेगा। बजट से पहले जनता और विशेषज्ञों से सुझाव लेने की बात कहकर सरकार ने परामर्श की तस्वीर पेश की है, लेकिन असली परीक्षा अब सदन और ज़मीन—दोनों पर होगी।
इस वर्ष को “कृषि कल्याण वर्ष” घोषित करते हुए देवड़ा ने किसानों के लिए विशेष प्रावधानों का संकेत दिया है। सिंचाई परियोजनाएं, फसल प्रबंधन, ग्रामीण ढांचे और समर्थन योजनाओं पर जोर की बात कही गई है। सवाल यह है कि घोषणाओं से आगे बढ़कर क्या खेत तक राहत पहुंचेगी? किसान आय, लागत और बाज़ार की चुनौतियों के बीच ठोस राहत चाहते हैं, केवल शब्द नहीं।
मिडिल क्लास को लेकर भी सरकार ने नरमी का संदेश दिया है। महंगाई पर गंभीर होने और पहले दी गई टैक्स राहत का हवाला देते हुए देवड़ा ने भरोसा दिलाया कि बजट संतुलित होगा। लेकिन बढ़ती रोज़मर्रा की लागत के बीच मध्यम वर्ग को सीधी राहत कितनी और कैसे मिलेगी—यह देखना बाकी है।
तीन वर्षों के रोडमैप की बात करते हुए वित्त मंत्री ने साफ कहा कि जो विभाग आवंटित राशि खर्च नहीं कर पाएंगे, उनका बजट नहीं बढ़ेगा। यह संकेत है कि सरकार अब प्रदर्शन आधारित आवंटन की ओर बढ़ना चाहती है। साथ ही स्वास्थ्य, सड़क, गरीब कल्याण और बुनियादी ढांचे पर फोकस का ऐलान किया गया है।
कांग्रेस के कर्ज संबंधी आरोपों पर पलटवार करते हुए देवड़ा ने कहा कि सरकार का कर्ज “निवेश” है, जो पूंजीगत कार्यों के लिए लिया जाता है। जीएसडीपी की 3% सीमा के भीतर ऋण लेने और समय पर ब्याज भुगतान का दावा भी किया गया। केंद्र से 50 वर्षों के लिए शून्य ब्याज ऋण मिलने की बात जोड़कर सरकार ने वित्तीय अनुशासन की तस्वीर पेश की है।
अब निगाहें इस पर हैं कि “सर्वस्पर्शी” बजट का दावा हकीकत में कितना सर्वहितकारी साबित होता है—या फिर यह सियासी संतुलन का एक और प्रयास बनकर रह जाएगा।










