MP बजट 2026 : ‘आंकड़ों की बाजीगरी या विकास की उड़ान?’ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का विपक्ष पर सीधा वार…
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए प्रदेश की आर्थिक सेहत का जो खाका खींचा, उसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। कल पेश होने वाले बजट 2026 से पहले मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि उनकी सरकार केवल ‘घोषणावीर’ नहीं है, बल्कि जमीन पर निवेश उतारने वाली सरकार है।
1. पूंजीगत व्यय में ‘अभूतपूर्व’ उछाल: कर्नाटक को पछाड़ने का दावा
मुख्यमंत्री ने आंकड़ों का प्रहार करते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों (2023-25) में पूंजीगत व्यय में 46% की ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। उन्होंने तुलनात्मक राजनीति का पासा फेंकते हुए कहा:
* मध्य प्रदेश का अनुमानित पूंजीगत व्यय ₹82,513 करोड़ रहने की संभावना है।
* जबकि कांग्रेस शासित कर्नाटक जैसे विकसित राज्य का यह आंकड़ा ₹71,000 करोड़ पर सिमट गया है।
“हम केवल बातें नहीं करते, जमीन पर निवेश उतारते हैं। हमारी प्राथमिकता इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी है।” – डॉ. मोहन यादव
2. अर्थव्यवस्था की ‘डबल डिजिट’ रफ्तार
डॉ. यादव ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर विपक्ष के तमाम आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि मध्य प्रदेश की GSDP (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) अब ‘डबल डिजिट’ में दौड़ रही है।
* गत वर्ष वृद्धि दर: 10%
* वर्तमान अनुमान: 11% से अधिक
मुख्यमंत्री के अनुसार, लगातार दो वर्षों तक दो अंकों में विकास दर हासिल करना मध्य प्रदेश की मजबूत होती अर्थव्यवस्था का जीवंत प्रमाण है।
3. एमएसएमई और कृषि: मध्य प्रदेश का नया ‘पावर हाउस’
मुख्यमंत्री ने तीखे लहजे में कहा कि मध्य प्रदेश अब बीमारू राज्य की छवि से बहुत आगे निकल चुका है। एमएसएमई (MSME) सेक्टर और कृषि सुधारों की सफलता को उन्होंने ‘अद्भुत’ करार दिया। उन्होंने दावा किया कि प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और प्रदेश अब विकास के मामले में देश के अग्रणी राज्यों को चुनौती दे रहा है।
तहलका विश्लेषण : क्या बजट 2026 उम्मीदों पर खरा उतरेगा?
मुख्यमंत्री के आत्मविश्वास से भरे इन बोलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कल का बजट भारी-भरकम आवंटन और विकास के बड़े लक्ष्यों वाला होगा। जहां एक ओर सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है, वहीं विपक्ष इन आंकड़ों को ‘कर्ज के जाल’ की संज्ञा दे सकता है।
मुख्य बिंदु जिन पर रहेगी कल नजर:
* क्या ₹82,513 करोड़ का पूंजीगत व्यय धरातल पर रोजगार पैदा करेगा?
* बेहतर कनेक्टिविटी और नए उद्योगों के लिए क्या विशेष प्रावधान होंगे?
* 11% की ग्रोथ रेट का आम आदमी की जेब पर क्या असर होगा?










