संपादक रानु शर्मा…
भोपाल | विधानसभा
भागीरथपुरा की मौतों पर विधानसभा में गूंजा हंगामा, उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस का तीखा प्रदर्शन
मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव खुलकर सामने आया। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई 35 मौतों के मुद्दे पर कांग्रेस विधायक दल ने विधानसभा परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन कर सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया।
विधानसभा परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने कांग्रेस विधायकों ने हाथों में गंदे पानी से भरी बोतलें और नारे लिखी तख्तियां लेकर सांकेतिक प्रदर्शन किया। “स्वच्छ पानी दो”, “मौतों का जिम्मेदार कौन?” जैसे नारों के साथ सरकार के खिलाफ तीखी नारेबाजी की गई। प्रदर्शन का नेतृत्व नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने किया।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 35 लोगों की मौत होना केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सरकार की नाकामी का परिणाम है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े हादसे के बाद भी सरकार जिम्मेदारी तय करने के बजाय बचाव की मुद्रा में है। सिंघार ने नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से नैतिक आधार पर तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण में स्वच्छ पेयजल के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि प्रदेश के कई हिस्सों में जनता को दूषित और मलयुक्त पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। “हर नागरिक तक स्वच्छ पानी पहुंचाना सरकार की पहली जिम्मेदारी है। हर व्यक्ति महंगा आरओ पानी खरीदने में सक्षम नहीं है। स्वच्छ पानी कोई सुविधा नहीं, बल्कि बुनियादी अधिकार है,” सिंघार ने कहा।
कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि इतनी बड़ी जनहानि के बावजूद सरकार विधानसभा में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा से क्यों बच रही है। विपक्ष ने चेतावनी दी कि जब तक पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिलता और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक कांग्रेस का संघर्ष जारी रहेगा।
भागीरथपुरा की त्रासदी ने प्रदेश में पेयजल व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इस राजनीतिक और मानवीय संकट का जवाब कैसे देती है।










