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​”झाबुआ में भ्रष्टाचार का ‘पारिवारिक बिजनेस’: लोकायुक्त ने रिश्वतखोर बाबू और उसके पति को रंगे हाथों दबोचा

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झाबुआ आयुष कार्यालय में लोकायुक्त का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, रिश्वतखोर बाबू और उसका पति रंगे हाथों गिरफ्तार!

झाबुआ/इंदौर: सरकारी दफ्तरों में जड़ें जमा चुके भ्रष्टाचार के खिलाफ इंदौर लोकायुक्त पुलिस ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। इस बार लोकायुक्त के निशाने पर आया है जिला आयुष कार्यालय झाबुआ, जहाँ चंद रुपयों की खातिर ईमान बेचने वाली एक महिला कर्मचारी और उसके पति को रंगे हाथों दबोचा गया।

₹10,000 की रिश्वत और ‘साहब’ का अहंकार धराशायी

मिली जानकारी के अनुसार, जिला आयुष कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-2 श्रीमती रत्ना प्रेम पंवार ने एक फरियादी से उसके जायज काम के बदले रिश्वत की मांग की थी। भ्रष्टाचार की यह भूख इतनी बढ़ गई कि रत्ना पंवार ने अपने पति नरेन्द्र पंवार को भी इस काले धंधे में साझीदार बना लिया। लोकायुक्त टीम ने जाल बिछाया और जैसे ही ₹10,000 की रिश्वत राशि का लेन-देन हुआ, टीम ने दोनों को रंगे हाथों धर दबोचा।

 

आरोपी नंबर 1: श्रीमती रत्ना प्रेम पंवार (सहायक ग्रेड-2, जिला आयुष कार्यालय झाबुआ)

आरोपी नंबर 2: श्री नरेन्द्र पंवार (आरोपी महिला का पति)

रिश्वत की राशि: ₹10,000 (नकद)

 कार्रवाई टीम: लोकायुक्त पुलिस, इंदौर

व्यवस्था पर सवाल: “आयुष विभाग जिसका काम लोगों को स्वास्थ्य और जीवन देना है, वहाँ के बाबू जनता का खून चूसने में लगे हैं। जब दफ्तरों में पति-पत्नी मिलकर भ्रष्टाचार का सिंडिकेट चलाने लगें, तो समझ लीजिए कि नैतिकता किस पाताल में गिर चुकी है।”

 

भ्रष्टाचारियों में हड़कंप

लोकायुक्त की इस ‘ट्रैप कार्रवाई’ ने झाबुआ के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। लोकायुक्त पुलिस की इस दबिश ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार चाहे पर्दे के पीछे हो या खुलेआम, कानून के लंबे हाथों से बचना नामुमकिन है। फिलहाल पुलिस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है।

 

Tahalka Bharat
Author: Tahalka Bharat

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