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बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी में ‘चमत्कारी’ पीएचडी!

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महाघोटाला: बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी में ‘शॉर्टकट’ पीएचडी का खेल, 15 महीनों में ही बाँट दीं डिग्रियां!

खबर संकलन…!

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी का शिक्षा जगत एक बार फिर कलंकित हुआ है। ‘एमपी अजब है, सबसे गजब है’ की कहावत को चरितार्थ करते हुए बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (BU) ने वह कर दिखाया है जो अकादमिक दुनिया में असंभव माना जाता है। आरटीआई (RTI) से हुए सनसनीखेज खुलासे के अनुसार, जिस पीएचडी की डिग्री को पूरा करने में पसीने छूट जाते हैं, उसे यहाँ महज 1 साल, 3 महीने और 25 दिन के ‘रिकॉर्ड समय’ में रेवड़ियों की तरह बाँट दिया गया।

नियमों की धज्जियाँ, भ्रष्टाचार का ‘जिन’ बाहर
विश्वविद्यालय के ऑर्डिनेंस 45 के अनुसार, शोध कार्य (Thesis) जमा करने की न्यूनतम अवधि 18 से 24 महीने निर्धारित है। लेकिन बीयू के जादुई गलियारों में नियमों को ताक पर रखकर भ्रष्टाचार का ऐसा खेल खेला गया कि समय सीमा को ही बौना कर दिया गया। यह सीधा-सीधा अकादमिक धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितता का मामला नजर आ रहा है।

निशाने पर मंत्रालय के रसूखदार: ओएसडी अनिल पाठक की डिग्री पर सवाल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा धमाका मंत्रालय में पदस्थ ओएसडी अनिल पाठक के विरुद्ध हुई शिकायत से हुआ है। आरोप है कि गणित विषय में उनके द्वारा की गई पीएचडी की समयावधि और प्रक्रिया पूरी तरह संदेहास्पद है।

बड़ा सवाल: क्या इसी ‘संदिग्ध’ पीएचडी के दम पर असिस्टेंट प्रोफेसर से उच्च पद तक का सफर तय किया गया?

जांच का घेरा: शिकायत में मांग की गई है कि उनके शोध की बारीकी से जांच हो ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठते सवाल

शिकायत की प्रति उच्च शिक्षा विभाग के पीएस अनुपम राजन, कुलगुरु एस.के. जैन और रजिस्ट्रार एस.बी. सिंह को दस्तावेजों समेत सौंपी गई है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये रसूखदार अधिकारी अपने ही विभाग में पनप रहे इस कैंसर का इलाज करेंगे?

“एक तरफ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विभाग के ही ‘दीमक’ सिस्टम को खोखला कर रहे हैं। अगर पीएचडी जैसी डिग्री भी सेटिंग से मिलने लगेगी, तो उच्च शिक्षा का भविष्य अंधकारमय है।”

भ्रष्टाचार का मॉडल बना बीयू?

राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) के बाद अब बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी भी भ्रष्टाचार की सुर्खियों में है। यह केवल एक छात्र या एक डिग्री का मामला नहीं है, बल्कि उस पूरी व्यवस्था पर तमाचा है जो योग्यता और मेहनत की दुहाई देती है।

Tahalka Bharat
Author: Tahalka Bharat

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