तमिलनाडु में एक धार्मिक आयोजन के दौरान मचा हाहाकार, मच गई भगदड़… और चंद मिनटों में 36 मासूम जिंदगियाँ हमेशा के लिए खामोश हो गईं…!

तेज गर्मी और उमस से कई लोग बेहोश होकर गिरने लगे… और फिर क्या था… भीड़ में अफरातफरी मच गई… महिलाएं और बच्चे दबते चले गए… चीख-पुकार मच गई लेकिन किसी की आवाज़ सुनाई नहीं दी…!

हादसे की जगह पर अफरा-तफरी का मंजर ऐसा था कि चारों तरफ सिर्फ चीखें सुनाई दे रही थीं… शवों के ढेर लग गए… लोग अपने परिजनों को तलाशते रोते-बिलखते नज़र आए…!
➡️ पुलिस और प्रशासन मौके पर तो पहुंचा… लेकिन तब तक देर हो चुकी थी…!
➡️ घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया… कई लोगों की हालत अभी भी गंभीर बताई जा रही है…!
➡️ मुख्यमंत्री ने हादसे पर दुख जताते हुए जांच के आदेश दिए और मृतकों के परिवारों के लिए मुआवज़े का ऐलान किया है…!
⚡ लेकिन बड़ा सवाल यही है…!
इतने बड़े आयोजन में भीड़ प्रबंधन क्यों फेल हुआ?
सुरक्षा इंतज़ाम नाकाफी क्यों थे?
और आखिरकार इतनी बड़ी लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेगा?
यह दर्दनाक हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि भीड़ की ताकत अगर संभाली न जाए… तो वह विनाश में बदल जाती है…!










