भागीरथपुरा दूषित पेयजल मामले पर उमंग सिंघार ने सरकार से मांगा जवाब
इंदौर, मध्य प्रदेश। मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पेयजल मामले को लेकर सरकार और नगर प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। इंदौर स्थित रेसीडेंसी में आयोजित प्रेस वार्ता में सिंघार ने न्यायिक जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए पेयजल व्यवस्था, प्रशासनिक देरी, तकनीकी रिकॉर्ड और जिम्मेदारी तय करने को लेकर जवाब मांगा।
सिंघार ने कहा कि स्वच्छता के लिए देशभर में पहचान रखने वाले इंदौर में दूषित पेयजल की घटना ने नागरिकों के सुरक्षित पेयजल और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।
न्यायिक जांच रिपोर्ट का हवाला देकर उठाए सवाल
सिंघार के अनुसार, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा गठित न्यायिक जांच आयोग ने भागीरथपुरा में पेयजल प्रदूषण, बीमारी और मौतों के कारणों के साथ प्रशासनिक एवं तकनीकी खामियों की जांच की। उन्होंने दावा किया कि रिपोर्ट में पेयजल के दूषित होने और सीवेज के पेयजल पाइपलाइन में प्रवेश को लेकर महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।
प्रेस वार्ता में सिंघार ने रिपोर्ट में 36 मौतों की जांच और उनमें 22 मौतों को दूषित पानी से संबंधित माने जाने का उल्लेख किया। उन्होंने जल एवं सीवरेज व्यवस्था की योजना, रखरखाव और निगरानी को लेकर भी सवाल उठाए।
इंजीनियरिंग रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जांच के दौरान लेआउट प्लान, ब्लूप्रिंट, डिजाइन ड्रॉइंग और पाइपलाइन अलाइनमेंट मैप सहित कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए जाने का उल्लेख सामने आया है।
उन्होंने सवाल किया कि महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज जांच आयोग के सामने उपलब्ध क्यों नहीं थे और रिकॉर्ड के संरक्षण एवं उपलब्धता में यदि लापरवाही हुई तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी।
66 दिन फाइल लंबित रहने का मुद्दा उठाया
सिंघार ने भागीरथपुरा से जुड़े सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों में प्रशासनिक देरी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि संबंधित फाइल मेयर के हस्ताक्षर के लिए 66 दिनों तक लंबित रही। हालांकि, उनके अनुसार जांच आयोग ने केवल फाइल लंबित रहने के आधार पर मेयर की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय नहीं की।
सिंघार ने सरकार और नगर निगम से स्पष्ट करने को कहा कि महत्वपूर्ण परियोजना की फाइल इतने लंबे समय तक क्यों लंबित रही और प्रशासनिक देरी की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी।
₹10 लाख मुआवजे की सिफारिश पर भी मांगा जवाब
नेता प्रतिपक्ष ने न्यायिक जांच आयोग की मुआवजे संबंधी सिफारिशों का उल्लेख करते हुए सरकार से प्रभावित परिवारों को सहायता देने की मांग की। उनके अनुसार, मृतकों के परिवारों के लिए ₹10 लाख तथा प्रभावित मरीजों के लिए आर्थिक एवं चिकित्सकीय सहायता की सिफारिश की गई है।
सिंघार ने सरकार से पूछा कि इन सिफारिशों को कब लागू किया जाएगा और प्रभावित परिवारों को भुगतान कब तक मिलेगा।
सिंघार बोले—पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी
उमंग सिंघार ने कहा कि भागीरथपुरा के प्रभावित लोगों को पूरे मामले में पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने सरकार से न्यायिक जांच रिपोर्ट में सामने आए बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब देने और प्रभावित परिवारों के लिए सहायता सुनिश्चित करने की मांग की।
मुख्य सवाल: दूषित पेयजल की स्थिति कैसे बनी, प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर कहां चूक हुई, महत्वपूर्ण रिकॉर्ड उपलब्ध क्यों नहीं थे और प्रभावित परिवारों को न्यायिक जांच की सिफारिशों का लाभ कब मिलेगा—इन सवालों पर अब सरकार और नगर प्रशासन के जवाब पर नजर रहेगी।










