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पीथमपुर में फार्मा यूनिट की बड़ी लापरवाही: ज़हरीले अपशिष्ट से मंडराया महामारी का खतरा, बंद क्यों नहीं हुई कंपनी?

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पीथमपुर सेक्टर-3 में घोर लापरवाही: क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड?

भोपाल/पीथमपुर
मध्य प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र पीथमपुर में पर्यावरण मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए जन-स्वास्थ्य और बेजुबान पशुओं की जिंदगी से खिलवाड़ का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। सेक्टर-3 स्थित मेसर्स एनालटेक लैब्स प्राइवेट लिमिटेड (प्लॉट नंबर 825, 826, 827) पर खुलेआम केमिकल युक्त जहरीला और काला अपशिष्ट जल (Effluent) बाहर बहाने के आरोप लगे हैं।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कंपनी अपने ईटीपी (Effluent Treatment Plant) के पास से तथा मुख्य गेट की बाउंड्री वॉल के नीचे से असुरक्षित तरीके से जहरीला पानी बाहर छोड़ रही है। यह दूषित पानी आसपास के रहवासी क्षेत्रों तालाब नदी में फैलकर गंभीर बीमारियों का कारण बन रहा है। इतना ही नहीं, यह खतरनाक केमिकल युक्त पानी बहकर सागौर क्षेत्र की अंग्रेड नदी में होकर चंबल नदी घट्टाबिल्लोद में जाकर मिल रहा है। नदी का दूषित पानी पीने से क्षेत्र के गाय, भैंस और अन्य पशु गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं तथा कई बेजुबान दम तोड़ चुके हैं।

सीएम हेल्पलाइन
( पहली शिकायत क्रमांक: 39427936
दूसरी शिकायत क्रमांक 40612251 )
में दर्ज कराई गई शिकायत के उत्तर में यह स्वीकार किया गया है कि मेसर्स एनालटेक लैब्स एक API (Active Pharmaceutical Ingredient) यानी बल्क ड्रग निर्माण इकाई है। विभाग के अनुसार 22 जुलाई 2026 को क्षेत्रीय अधिकारी द्वारा निरीक्षण किया गया था।
ओर जिम्मेदार प्रदूषण विभाग अधिकारी ने कंपनी के मेन गेट से ही निरीक्षण की फर्जी रिपोर्ट बना दी जबकि उस दिन शिकायतकर्ता को भी सूचित नहीं किया गया
जिसके बाद L2 अधिकारी ओर L3 अधिकारी ने एक दूसरे की रिपोर्ट की कॉपी पेस्ट कर दी ओर शिकायत का निराकरण नहीं किया गया
लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि कागजी निरीक्षणों और औपचारिकता के बीच कंपनी का बेरोकटोक प्रदूषण फैलाना जारी है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) की मंशा पर सीधे सवाल खड़े हो रहे हैं।

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कानूनी ढांचा और पर्यावरणीय नियम क्या कहते हैं?
एक बल्क ड्रग (API) निर्माण इकाई से निकलने वाला अपशिष्ट जल अत्यधिक विषैला और बायोलॉजिकली खतरनाक होता है। कानून के अनुसार ऐसी इकाइयों को सख्त मानकों का पालन करना अनिवार्य है:
1. ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) का अनिवार्य नियम
जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के दिशा-निर्देशों के तहत बल्क ड्रग इकाइयों के लिए Zero Liquid Discharge (ZLD) प्रणाली का पालन करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इसका सीधा अर्थ है कि संयंत्र से निकलने वाले 1 लीटर पानी को भी परिसर के बाहर किसी नाले, मैदान या तालाब,नदी प्राकृतिक जलस्रोत में नहीं बहाया जा सकता। सारा पानी ट्रीट होकर पुनः उपयोग (Reuse) होना चाहिए।
2. प्राकृतिक जलस्त्रोतों (अंग्रेड नदी,चंबल नदी) को दूषित करने पर प्रतिबंध
जल अधिनियम, 1974 की धारा 24 के तहत किसी भी जहरीले या प्रदूषित पदार्थ को किसी भी नदी, नाले या भूमि पर छोड़ना संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है। नदी में रसायनों का प्रवाह पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 7 और 9 का सीधा उल्लंघन है।
3. खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन (Hazardous Waste Rules, 2016)
फार्मास्यूटिकल कंपनियों से निकलने वाली गाद (Sludge) और जहरीले रसायन ‘रेड कैटेगरी’ में आते हैं। इन्हें बिना उपचारित किए खुले में बहाना या छोड़ना मानव आबादी और पशुधन के लिए सीधे तौर पर जानलेवा श्रेणी का अपराध माना जाता है।
कार्रवाई न होने पर कौन-से कड़े प्रावधान लागू किए जाने चाहिए?
पर्यावरण कानून के तहत दोषी कंपनियों और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर निम्नलिखित कठोर कदम उठाने का स्पष्ट प्रावधान है:

| कानून / धारा | संभावित कार्रवाई व दण्ड |
|—|
| जल अधिनियम, 1974 की धारा 33A | प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तत्काल प्रभाव से कंपनी की बिजली और पानी की आपूर्ति काटने तथा उत्पादन बंद (Closure Order) करने का पूर्ण कानूनी अधिकार है। |
| जल अधिनियम की धारा 41 / 43 | नियमों का उल्लंघन करने पर कंपनी के निदेशकों/प्रबंधकों के खिलाफ 3 वर्ष से लेकर 7 वर्ष तक के कारावास और अर्थदंड का प्रावधान है। |
| पर्यावरण क्षतिपूर्ति (Environmental Compensation) | NGT के दिशानिर्देशों के अनुसार ‘Polluter Pays Principle’ के तहत नदी और आसपास के भूजल को नुकसान पहुंचाने के एवज में करोड़ों रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया जाना चाहिए। |
| भारतीय न्याय संहिता (BNS) | लोक उपद्रव (Public Nuisance), पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने और पशुओं की मृत्यु का कारण बनने पर आपराधिक धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज की जा सकती है। |
मुख्य सवाल: कुंभकर्णी नींद में क्यों सोया है प्रशासन?
* निरीक्षण के बाद भी नतीजा शून्य क्यों? जब 22 जुलाई 2026 को क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारियों द्वारा कंपनी का निरीक्षण किया जा चुका है, तो फिर खुले में बहता जहरीला पानी और नदी का प्रदूषण अब तक क्यों नहीं रुका?
* जिम्मेदार कौन? यदि इस दूषित पानी के कारण सागौर,सुलवाड़,घट्टाबिल्लोद और आसपास के क्षेत्र में कोई महामारी फैलती है या किसी नागरिक/पशुधन की जान को बड़ा नुकसान पहुंचता है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा जबकि इस कंपनी के लोगो ने दो से तीन बार सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत भी कर रखी है
कंपनी प्रबंधन या मूकदर्शक बना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड?
मांग: जनहित और पर्यावरण की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए क्षेत्रीय नागरिकों ने मांग की है कि मेसर्स एनालटेक लैब्स (प्लॉट नं. 825, 826, 827) का तत्काल निष्पक्ष लैब परीक्षण (Sampling) कराया जाए, ईटीपी की वास्तविक क्षमता की जांच हो और नियमों के उल्लंघन पर कंपनी को तुरंत सील कर जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

Tahalka Bharat
Author: Tahalka Bharat

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