भोपाल।
मध्य प्रदेश का किसान एक बार फिर कर्ज, आर्थिक दबाव और नीतिगत सवालों के केंद्र में है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राज्य के हर किसान परिवार पर औसतन ₹74,420 का कर्ज है। यह स्थिति तब है जब देश के कृषि मंत्री स्वयं मध्य प्रदेश से आते हैं और राज्य में लगभग दो दशकों से भाजपा की सरकार है, जबकि केंद्र में भी पिछले 12 वर्षों से भाजपा सत्ता में है।
कर्ज का बढ़ता बोझ
विशेषज्ञों का मानना है कि खेती की लागत में लगातार वृद्धि, मौसम की अनिश्चितता, समर्थन मूल्य को लेकर असंतोष और बाजार की अस्थिरता ने किसानों की आर्थिक स्थिति को कमजोर किया है। उर्वरक, बीज, डीजल और कृषि उपकरणों की कीमतों में बढ़ोतरी ने खेती को महंगा बना दिया है, जबकि आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो सकी।
आत्महत्याओं के आंकड़े चिंताजनक
एनसीआरबी (राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 20 वर्षों में मध्य प्रदेश में 20 हजार से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है। ये आंकड़े राज्य की कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि आर्थिक तंगी, कर्ज वसूली का दबाव और फसल नुकसान जैसे कारण किसानों को मानसिक और आर्थिक संकट में धकेल रहे हैं।
दोगुनी आय का वादा और जमीनी हकीकत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा गया था। वहीं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी लगातार किसान हितैषी योजनाओं की बात करते रहे हैं। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि जमीनी स्तर पर किसानों की आय में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, बल्कि कर्ज का बोझ और बढ़ा है।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते पर सवाल
अमेरिका के साथ संभावित ट्रेड डील को लेकर भी आशंकाएं जताई जा रही हैं। किसान संगठनों का कहना है कि यदि आयात-निर्यात नीति में संतुलन नहीं रखा गया तो इसका असर स्थानीय किसानों पर पड़ सकता है। उनका तर्क है कि पहले से कर्ज में डूबे किसानों के सामने प्रतिस्पर्धा और बढ़ सकती है।
किसान सम्मान और नीति सुधार की मांग
किसान संगठनों और विपक्षी नेताओं का कहना है कि मेहनतकश किसान देश के अन्नदाता हैं। करोड़ों लोगों की थाली तक भोजन पहुंचाने वाले किसानों को आर्थिक सुरक्षा, उचित समर्थन मूल्य, कर्ज राहत और स्थायी कृषि नीति की आवश्यकता है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच असली सवाल यह है कि क्या आने वाले समय में ऐसी नीतियां बनेंगी जो किसानों को कर्ज के दलदल से बाहर निकाल सकें और उनकी आय को वास्तव में स्थिर व सम्मानजनक बना सकें।
मध्य प्रदेश का किसान आज राहत, भरोसे और ठोस समाधान की प्रतीक्षा में है।










