केरल में बदलाव की दहाड़ : मोदी ने फूंका शंखनाद, 100 साल की ‘दादी’ ने घर से दिखाया लोकतंत्र का दम
तिरुवल्ला/पलक्कड़ : केरल की राजनीति में इस बार ‘चुनावी वार’ आर-पार के मूड में नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तिरुवल्ला की धरती से हुंकार भरते हुए वामपंथी किले को ढहाने का खुला एलान कर दिया है। पीएम ने साफ लफ्जों में कहा कि इस बार केरल में LDF (लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट) की विदाई तय है और NDA की सरकार का आगमन निश्चित है।
“केरल में हवा नहीं, बदलाव की आंधी है”
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्षी खेमे पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि केरल अब “ऐतिहासिक बदलाव” की दहलीज पर खड़ा है। उन्होंने जनता की नब्ज टटोलते हुए कहा:
“मैं पहले भी केरल आया हूँ, लेकिन इस बार हवा का रुख बदला हुआ है। केरल की जनता सत्ता परिवर्तन के लिए पूरी तरह तैयार है।”
लोकतंत्र की मिसाल : 100 साल की कुचम्मा ने डाला वोट
एक तरफ जहाँ सियासी मैदान में जुबानी तीर चल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पलक्कड़ के कोंगड से लोकतंत्र की एक बेहद खूबसूरत और सशक्त तस्वीर सामने आई है। 100 वर्षीय कुचम्मा ने उम्र की बाधा को धता बताते हुए अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
होम वोटिंग का कमाल: चुनाव आयोग की टीम खुद कुचम्मा के घर पहुंची।
सुविधा: राज्य में उन बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए ‘होम वोटिंग’ की सुविधा दी गई है जो पोलिंग बूथ तक पहुंचने में असमर्थ हैं।
नजीर: कुचम्मा की इस भागीदारी ने उन युवाओं को आईना दिखाया है जो वोटिंग के दिन घर से निकलने में आलस दिखाते हैं।
सत्ता के समीकरणों में खलबली
पीएम मोदी का यह आत्मविश्वास और जमीन पर बुजुर्ग मतदाताओं का यह उत्साह बता रहा है कि केरल की राजनीति में इस बार कुछ बड़ा होने वाला है। वामपंथी सरकार के लिए यह ‘वेक-अप कॉल’ है, क्योंकि बीजेपी इस बार महज उपस्थिति दर्ज कराने के लिए नहीं, बल्कि सत्ता पलटने के इरादे से मैदान में है।
अब देखना यह होगा कि तिरुवल्ला की यह ललकार तिरुवनंतपुरम की कुर्सी तक पहुँचती है या नहीं!










