राष्ट्रपति मुर्मु को जीतू पटवारी का पत्र: “आदिवासियों को दया नहीं, अधिकार चाहिए”
भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के मध्य प्रदेश दौरे के अवसर पर उन्हें एक विस्तृत पत्र लिखकर प्रदेश के आदिवासी समाज की समस्याओं और अधिकारों का मुद्दा उठाया है। पटवारी ने कहा कि देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति होने के नाते आदिवासी समाज को उनसे विशेष उम्मीदें हैं।
पत्र में उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में करीब 1.53 करोड़ आदिवासी निवास करते हैं, लेकिन आज भी झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, मंडला, डिंडौरी, शहडोल और अन्य आदिवासी अंचलों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
पटवारी ने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्रों में स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी, स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों के रिक्त पद, कुपोषण, टीबी, बेरोजगारी और पलायन जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज जल, जंगल और जमीन से जुड़े अपने अधिकारों के लिए आज भी संघर्ष कर रहा है और वनाधिकार कानून तथा पेसा कानून का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि वे अपने दौरे के दौरान आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों से संवाद करें और राज्य सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, महिला सुरक्षा, वनाधिकार और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार सहित 10 प्रमुख मांगों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए निर्देशित करें।
पत्र के अंत में पटवारी ने कहा कि “आदिवासी समाज को दया नहीं, अधिकार चाहिए; आश्वासन नहीं, अवसर चाहिए; और प्रतीकात्मक सम्मान नहीं, बल्कि विकास में वास्तविक भागीदारी चाहिए।”










