भोपाल, मध्य प्रदेश
सच बोलना पड़ा महंगा: रिश्वतखोरी पर वायरल बयान के बाद मोहन यादव सरकार का बड़ा एक्शन, जल संसाधन विभाग के EE सस्पेंड!
मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ मोहन यादव सरकार ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। लोकायुक्त कार्रवाई के बाद मीडिया के सामने रिश्वतखोरी को लेकर एक अजीबोगरीब और बेबाक बयान देना जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री (EE) सी.बी. अहिरवार को भारी पड़ गया है। सरकार ने तत्काल प्रभाव से उन्हें निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मामला मध्य प्रदेश के सागर जिले का है, जहां 28 अक्टूबर को सागर लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जल संसाधन विभाग के संभागीय लेखाकार (डिविजनल अकाउंटेंट) दीपक परिहार और क्लर्क अरविंद पाठक को 45,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।
- रिश्वत की वजह: यह घूस ‘मझगवां मध्यम परियोजना’ के तहत किए गए नहर निर्माण कार्य के अंतिम बिल (Final Bill) को पास करने के एवज में मांगी गई थी।
- शिकायत: एक स्थानीय ठेकेदार ने लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसका भुगतान महीनों से अटका हुआ है और विभाग के कर्मचारी बिल पास करने के नाम पर अवैध वसूली कर रहे हैं।
- बरामदगी: लोकायुक्त टीम ने ट्रैप कार्रवाई के दौरान लेखाकार परिहार से 15,000 रुपये और क्लर्क पाठक से 30,000 रुपये बरामद किए थे।
वह वायरल बयान, जिसने टाल दी नौकरी और ले डूबी साख!
इस पूरी कार्रवाई के बाद जल संसाधन विभाग के EE सी.बी. अहिरवार का एक बयान सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया।
पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने कैमरे पर स्वीकार किया कि उन्होंने किसी तय ‘प्रतिशत’ या फिक्स कमीशन की मांग नहीं की थी, लेकिन अगर कोई अपनी मर्जी से पैसे दे देता था, तो वे उसे रख लेते थे।
भले ही लोकायुक्त की सीधे तौर पर पकड़ी गई गिरफ्त में EE अहिरवार शामिल नहीं थे, लेकिन उनका यह कैमरे पर दिया गया बयान कबूलनामे की तरह वायरल हो गया। जनता और प्रशासनिक हलकों में इसकी कड़ी आलोचना हुई, क्योंकि उन्होंने भ्रष्टाचार को गलत मानने के बजाय उसे सहज और सामान्य प्रक्रिया के रूप में पेश करने की कोशिश की थी।
सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति
बयान के सोशल मीडिया पर वायरल होने और भ्रष्टाचार को लेकर किरकिरी बढ़ने के बाद शासन ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया। प्रशासनिक लापरवाही और इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना ब बयानों पर सख्त कदम उठाते हुए मोहन यादव सरकार ने जल संसाधन विभाग के EE सी.बी. अहिरवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
निष्कर्ष: भ्रष्टाचार के खिलाफ इस सख्त कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि मध्य प्रदेश सरकार में अब न तो घूसखोरी बर्दाश्त की जाएगी और न ही भ्रष्टाचार को सामान्य बताने वाले ऐसे बयानों के लिए कोई जगह होगी।









