Search
Close this search box.

लाल परेड मैदान पर करोड़ों का जश्न : खाली कुर्सियों ने दिखाए सियासी आईने, कांग्रेस ने सवाल उठाया

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

लाल परेड मैदान पर मध्य प्रदेश स्थापना दिवस: करोड़ों के जश्न में खाली कुर्सियों ने दिखाए सियासी आईने, 2047 के ‘विकसित भारत’ के दावों पर उठे गंभीर सवाल

विशेष रिपोर्ट | भोपाल (मध्य प्रदेश)
दिनांक: नवंबर 2026

मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस के अवसर पर राजधानी भोपाल के ऐतिहासिक लाल परेड ग्राउंड पर राज्य सरकार द्वारा तीन दिवसीय भव्य समारोह का आयोजन किया गया। ‘विकसित मध्य प्रदेश – विकसित भारत 2047’ के संकल्प को ध्यान में रखते हुए आयोजित इस महा-उत्सव में प्रसिद्ध पार्श्व गायिका मोनाली ठाकुर की प्रस्तुतियां, भव्य आतिशबाजी और चाक-चौबंद प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं। सरकार का उद्देश्य जनता की भारी भागीदारी के साथ इस पर्व को ऐतिहासिक बनाना था, जिस पर करोड़ों रुपए का भारी-भरकम खर्च किया गया।
लेकिन, इस भव्यता और चमक-धमक के बीच जो तस्वीर सामने आई, उसने राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच एक बड़ा भूचाल ला दिया है।
तस्वीर का दूसरा पहलू: 90% खाली कुर्सियां और वायरल वीडियो
कार्यक्रम के पहले दिन जब रंगारंग प्रस्तुतियां चल रही थीं, उसी दौरान विपक्ष के एक प्रमुख नेता ने सोशल मीडिया पर एक लाइव वीडियो जारी कर दिया। इस वीडियो ने सरकार के तमाम दावों की पोल खोल दी।
आंकड़ों की जुबानी: वायरल वीडियो के अनुसार, आयोजन स्थल पर कुल क्षमता की महज 10% जनता ही मौजूद थी, जबकि 90% से अधिक कुर्सियां पूरी तरह खाली नजर आईं।
सोशल मीडिया पर तंज: वीडियो साझा करते हुए विपक्ष ने तिखा हमला बोला और लिखा—
 “मोहन बाबू को आज फिर भोपाल में खाली कुर्सियों ने आईना दिखा दिया है।”

‘कर्ज लेकर घी पीने’ वाली कहावत और बड़ा सवाल
इस वायरल वीडियो के सामने आने के बाद प्रदेश की वित्तीय स्थिति और प्राथमिकताओं पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक ऐसे समय में जब राज्य सरकार पर भारी-भरकम कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है, ऐसे विलासितापूर्ण और महंगे आयोजनों में करोड़ों रुपए फूंकना—”कर्ज लेकर घी पीने” वाली कहावत को चरितार्थ करता है।
जनता के बीच अब यह चर्चा आम हो गई है कि—
क्या इस प्रकार के आयोजनों में जनता की वास्तविक रुचि के बिना पानी की तरह पैसा बहाना उचित है?
यदि राजधानी भोपाल के मुख्य आयोजन में ही जनता की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है, तो वर्ष 2047 तक ‘विकसित मध्य प्रदेश और विकसित भारत’ का सपना कागजी दावों से जमीन पर कैसे उतर पाएगा?
इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों और शासन पर उठ रहे सवाल
लाखों-करोड़ों रुपए के बजट वाले इस तीन दिवसीय आयोजन की रूपरेखा तैयार करने वाले इवेंट विभागों, संबंधित कंपनियों और सरकारी अमले की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ खड़े हुए हैं। जब प्रचार-प्रसार और व्यवस्थाओं के लिए भारी-भरकम बजट खर्च किया गया था, तब आम जनता को मैदान तक खींचने में तंत्र कहां विफल रहा? क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या जनता का सरकार के इन आयोजनों से मोहभंग हो चुका है?
अब आगे क्या? (जनता की अदालत में खबर)
विपक्ष का काम सरकार को आईना दिखाना होता है और आज एक बार फिर जमीनी हकीकत जनता के सामने आ चुकी है। इस बहुचर्चित आयोजन के तीनों दिन पूरे होने के बाद, हमारी टीम प्रदेश की जनता के बीच जाकर उनका सीधा रुख और प्रतिक्रिया जानने का प्रयास करेगी।
क्या इस समाचार के प्रकाशन के बाद सरकार और प्रशासनिक तंत्र अपनी कार्यशैली में कोई सुधार लाएगा, या फिजूलखर्ची का यह सिलसिला यूं ही जारी रहेगा?
यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। हमारी इस विशेष कवरेज का अगला अपडेट जल्द ही हमारे पाठकों तक पहुंचाया जाएगा।

Tahalka Bharat
Author: Tahalka Bharat

Leave a Comment

और पढ़ें