संपादक रानू शर्मा…!
जबलपुर की ‘अग्निपरीक्षा’: कब तक कागजों में दबे रहेंगे फायर सेफ्टी नियम?
MP – जबलपुर उत्तर मध्य से भाजपा विधायक अभिलाष पांडे ने विधानसभा में अपनी ही सरकार के सामने एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है, जो प्रशासन की सुस्ती की धज्जियां उड़ाता है। उन्होंने शहर में फायर सेफ्टी एक्ट की धरातल पर अनुपस्थिति और अधिकारियों की लापरवाही पर तीखे प्रहार किए।
नाममात्र का कानून: विधायक ने साफ किया कि जबलपुर में फायर सेफ्टी के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है। बहुमंजिला इमारतों और अस्पतालों में आग से सुरक्षा के इंतजाम भगवान भरोसे हैं।
प्रशासन की ‘कुंभकर्णी’ नींद: पांडे ने सदन में पूछा कि आखिर बार-बार होने वाले हादसों के बावजूद प्रशासन कड़े कदम उठाने से क्यों कतरा रहा है? क्या विभाग किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है?
अवैध निर्माण पर चुप्पी: उन्होंने उन ऊंची इमारतों और व्यावसायिक केंद्रों पर भी निशाना साधा जो बिना फायर एनओसी (NOC) के धड़ल्ले से चल रहे हैं, और जिन्हें सिस्टम का खुला संरक्षण प्राप्त है।
कड़वा सच: “विधानसभा में गूंजी यह आवाज केवल एक सवाल नहीं, बल्कि उन भ्रष्ट अधिकारियों को चेतावनी है जो चंद रुपयों के लिए लोगों की जान दांव पर लगा रहे हैं।”
निष्कर्ष:
अभिलाष पांडे का यह कड़ा रुख संकेत है कि अब ‘फाइलें घुमाने’ का वक्त खत्म हो चुका है। यदि अब भी फायर सेफ्टी एक्ट को सख्ती से लागू नहीं किया गया, तो अगली अग्नि-त्रासदी के लिए जिम्मेदार सीधे तौर पर स्थानीय प्रशासन होगा।










