MP के ‘लाल’ चमके: यूपीएससी के शिखर पर मध्यप्रदेश का कब्जा, मुख्यमंत्री ने इंदौर से भरी हुंकार!
भोपाल/इंदौर: मध्यप्रदेश अब केवल ‘हृदय प्रदेश’ नहीं, बल्कि ‘प्रतिभाओं का पावरहाउस’ बनकर उभरा है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के नतीजों ने साफ कर दिया है कि प्रदेश की मिट्टी में अब प्रशासनिक कौशल की नई इबारत लिखी जा रही है। शुक्रवार शाम इंदौर एयरपोर्ट पर मीडिया से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के चेहरे पर जीत की वह चमक साफ दिखी, जो किसी भी राज्य के मुखिया को अपने बच्चों की सफलता पर होती है।
टॉप-10 में ‘डबल धमाका’: एमपी का दबदबा
मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ इस बात को रेखांकित किया कि देशभर की सबसे कठिन मानी जाने वाली इस परीक्षा में मध्यप्रदेश के दो होनहारों ने टॉप-10 में अपनी जगह पक्की की है। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है; यह उन आलोचकों के मुँह पर करारा तमाचा है जो राज्य की शिक्षा और प्रतिभा पर सवाल उठाते थे।
“जब हमारे राज्य के युवा अखिल भारतीय स्तर पर अपना परचम लहराते हैं, तो यह केवल उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के संकल्प की जीत है।” — डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री
इंदौर की धरती से जोश भरा संबोधन
इंदौर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन नतीजों से उन्हें ‘विशेष प्रसन्नता’ हुई है। उन्होंने कहा कि इन युवाओं ने यह साबित कर दिया है कि यदि इरादे फौलादी हों, तो दिल्ली का रास्ता भोपाल और इंदौर की गलियों से होकर ही गुजरता है।
क्यों खास है यह जीत?
प्रशासनिक वर्चस्व: मध्यप्रदेश के युवाओं का टॉप-10 में आना राज्य की प्रशासनिक सेवा में बढ़ती पैठ को दर्शाता है।
युवाओं के लिए प्रेरणा: यह सफलता उन लाखों परीक्षार्थियों के लिए ईंधन का काम करेगी जो प्रदेश के छोटे शहरों और गाँवों में बैठकर बड़े सपने देख रहे हैं।
सरकार का प्रोत्साहन: मुख्यमंत्री का खुद आगे आकर युवाओं की पीठ थपथपाना यह संकेत देता है कि प्रदेश सरकार अब मेधावी छात्रों को हर संभव मंच प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री की यह बधाई केवल रस्म अदायगी नहीं, बल्कि एक संदेश है कि मध्यप्रदेश अब “फॉलोअर” नहीं, बल्कि “लीडर” पैदा कर रहा है। टॉप-10 में दो स्थान पाना तो बस शुरुआत है, आने वाला समय मध्यप्रदेश के गौरवपूर्ण प्रशासनिक इतिहास का गवाह बनेगा।










