मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिविल सेवा के ‘शूरवीरों’ को नवाजा, विरोधियों को दिया कड़ा संदेश
भोपाल | राजधानी के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आज ‘सफलता के मंत्र’ कार्यक्रम के दौरान प्रदेश की प्रशासनिक प्रतिभाओं का मेला लगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिविल सेवा परीक्षा में चयनित मध्य प्रदेश के होनहारों से न केवल सीधा संवाद किया, बल्कि उन्हें सम्मानित कर यह साफ कर दिया कि प्रदेश की मेधा अब रुकने वाली नहीं है।
सम्मान भी और विमोचन भी
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ‘मध्यप्रदेश की प्रतिभाओं का परचम’ नामक पुस्तक का विमोचन किया। कार्यक्रम में चयनित अभ्यर्थियों की संघर्ष गाथा का जब प्रजेंटेशन हुआ, तो हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ये चयन केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि प्रदेश के गौरव का विस्तार है।
शिक्षा मंत्री का ‘भाषा के भ्रम’ पर प्रहार
कैबिनेट मंत्री इंदर सिंह परमार ने मीडिया से चर्चा के दौरान उन लोगों को आड़े हाथों लिया जो शिक्षा और भाषा को लेकर भ्रम फैलाते हैं। उन्होंने तीखे लहजे में कहा:
“भाषा कभी शिक्षा की रुकावट नहीं रही। कुछ लोग जानबूझकर भ्रम का जाल बुनते हैं। सच्चाई यह है कि पहले मध्य प्रदेश से गिने-चुने नाम आते थे, लेकिन आज हमारे बच्चे हर बाधा तोड़कर आगे बढ़ रहे हैं। यह सरकार के नवाचार और बच्चों की जिद्द का परिणाम है।”
सोशल मीडिया के मायाजाल से दूरी और सफलता की “आपबीती”
सम्मानित हुए अभ्यर्थियों ने अपनी सफलता का कच्चा चिट्ठा खोलते हुए बताया कि सिविल सेवा की राह कांटों भरी थी। उन्होंने युवाओं को नसीहत दी कि सोशल मीडिया के दिखावे से दूर रहकर केवल और केवल फोकस ही उन्हें इस मुकाम तक लाया है। चयनित युवाओं ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के त्याग और अपनी निरंतरता को दिया।
* नवाचार की जीत: मध्य प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रयोग कर रही है, जिसके परिणाम अब धरातल पर दिख रहे हैं।
* बढ़ती संख्या: यूपीएसई और सिविल सेवा में प्रदेश के युवाओं की बढ़ती भागीदारी ने पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं।
* प्रेरणा पुंज: चयनित अभ्यर्थियों के अनुभव अब आने वाली पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक बनेंगे।










