भोपाल । भारत की तस्वीरें और विकासात्मक दिशा तय करने वाली हकीकत–2027 को लेकर तैयारियां तेजी से हो गई हैं। इसी क्रम में आज कुशाभाऊ टिक्कर ऑडिटोरियम में ‘जनगणना-2027’ पर नामांकित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन का शुभारंभ किया गया।
2027 भारत की पहली ऐसी व्यापक वैलिडिटी होगी, जिसमें डिजिटल तकनीक का व्यापक और समसामयिक उपयोग शामिल है। इस गुणवत्ता के माध्यम से डेटा संग्रह, सत्यापन और विश्लेषण की प्रक्रिया की पहले तुलना में अधिक लचीलापन, विश्वसनीयता और तेजी होगी।
कॉन्फ्रेंस को दिखाते हुए स्केल ने कहा कि केवल आंकड़े का संकलन नहीं है, बल्कि यह देश की सबसे बड़ी सबसे महत्वपूर्ण डेटा प्रक्रिया है। आदर्श से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर ही सरकार की नीतियां और योजनाओं की आकार सूची होती है, आधार का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित होता है और समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक का विकास व्यक्ति की रणनीति तैयार की जाती है।
वास्तविकता–2027 कोव प्रक्रिया से आगे की ओर इशारा करते हुए कहा गया कि यह अभियान भारत के भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाला सबसे व्यापक, उपदेशात्मक और प्रेरक प्रयास है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार, आवास, सामाजिक सुरक्षा और छात्र-छात्रओं की पात्रता समान डेटा पर निर्भर करती है।
राज्यस्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन के उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों को डिजिटल आधारभूत प्रणाली, तकनीकी उपकरण और डेटा सुरक्षा से संबंधित गैजेट पर अध्ययन करना है, ताकि विश्वसनीयता का कार्य सुचारु, विश्वसनीय और त्रुटिहीन रूप से तैयार हो सके।
आदर्श–2027 न केवल नकली भारत की तस्वीर पेश करना, बल्कि विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ते देश के लिए ठोस और विश्वसनीय आधार भी तैयार करना।










