भोपाल बना ‘रणक्षेत्र’: कांग्रेस दफ्तर पर हमला, अब भाजपा भी थाने में! दिल्ली की AI समिट की आग में झुलसी मर्यादा
भोपाल | राजधानी भोपाल की सड़कों पर आज जो कुछ भी हुआ, उसने लोकतंत्र को शर्मसार कर दिया है। दिल्ली में आयोजित ‘India AI Impact Summit 2026’ के दौरान यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन की तपिश अब मध्य प्रदेश के दिल तक पहुँच गई है। शिवाजी नगर स्थित कांग्रेस मुख्यालय (PCC) में हुई तोड़फोड़ और पत्थरबाजी के बाद अब मामला कानूनी दांव-पेंच में उलझ गया है। जहाँ कांग्रेस ने हमलावरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं सूत्रों के हवाले से खबर है कि भाजपा खेमा भी अब ‘काउंटर-ब्लास्ट’ की तैयारी में हबीबगंज थाने पहुँच चुका है।
एक तरफ ‘सिर फूटा’, दूसरी तरफ ‘मानहानि’ का शोर
कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार ने सिर में पत्थर लगने और लहूलुहान होने की रिपोर्ट दर्ज कराई है। उन्होंने प्रमोद राजपूत, स्वप्निल मानखेड़े, विष्यरिणी तिवारी समेत करीब 100 अज्ञात लोगों पर न केवल जानलेवा हमले, बल्कि अनुसूचित जाति वर्ग के कार्यकर्ताओं को जातिगत गालियां देने का भी संगीन आरोप लगाया है।
हमले की बर्बरता:
* पीसीसी दफ्तर के कांच और फर्नीचर की तबाही।
* बीजेपी कार्यकर्ताओं पर डंडे और पत्थर लेकर दफ्तर में घुसने का आरोप।
* वीडियो साक्ष्य (CCTV और मोबाइल फुटेज) पुलिस के हवाले।
सत्ता पक्ष का पलटवार: भाजपा भी पहुंची थाने
राजनीतिक गलियारों और विश्वसनीय सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, भाजपा नेता भी इस मामले में पीछे नहीं हैं। भाजपा खेमे का दावा है कि उनके कार्यकर्ताओं के साथ भी बदसलूकी हुई है। भाजपा नेताओं का एक दल हबीबगंज थाने में अपनी ओर से शिकायत दर्ज कराने पहुँचा है। उनका कहना है कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उन्हें उकसाया और उन पर हमला किया।
सियासी गलियारों की चर्चा: “जब दिल्ली में यूथ कांग्रेस ने शॉर्टलिस्ट प्रदर्शन किया, तो भोपाल में उसका बदला लेने की यह कोशिश अब ‘FIR बनाम FIR’ की जंग में बदल गई है। सत्ता और विपक्ष दोनों ही अब विक्टिम कार्ड खेलने की होड़ में हैं।”
प्रमुख धाराएं और कानूनी पेच
फिलहाल पुलिस ने अपराध क्रमांक 26 के तहत धारा 191(2), 115(2), 125, 124(5), 151(3) और संपत्ति विरूपण अधिनियम की धारा 4, 5 के तहत मामला दर्ज किया है। लेकिन अगर भाजपा की ओर से भी FIR दर्ज होती है, तो भोपाल पुलिस के लिए यह ‘दोधारी तलवार’ पर चलने जैसा होगा।
निष्कर्ष: 2026 की राजनीति का ‘खूनी’ आगाज?
दिल्ली की ‘AI इम्पैक्ट समिट’ में तकनीक और भविष्य की बात होनी थी, लेकिन उसकी परिणति भोपाल की सड़कों पर खून और पत्थरों के रूप में हुई। सवाल यह है कि क्या प्रदेश की राजनीति अब संवाद के बजाय ‘थाने की एफआईआर’ और ‘सड़क के पत्थरों’ से तय होगी?










