रानी दुर्गावती थीं साहस, स्वाभिमान और पराक्रम की प्रतीक : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
जबलपुर। वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर जबलपुर में आयोजित भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें नारी शक्ति, अदम्य साहस और अटूट स्वाभिमान का प्रतीक बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि मां नर्मदा की पुत्री रानी दुर्गावती ने अपने अद्वितीय पराक्रम से अकबर जैसे शक्तिशाली शासक को तीन-तीन बार पराजित कर इतिहास में अमिट पहचान बनाई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जन्म तो सभी का होता है, लेकिन जो अपना संपूर्ण जीवन जनता की सेवा के लिए समर्पित कर देता है, वही सदियों तक सम्मान के साथ याद किया जाता है। लगभग 500 वर्षों बाद भी पूरा देश और प्रदेश रानी दुर्गावती को श्रद्धा और गौरव के साथ स्मरण करता है।
उन्होंने कहा कि जब देश के बड़े-बड़े राजा अकबर के सामने समर्पण कर रहे थे, तब रानी दुर्गावती हिमालय की तरह अडिग खड़ी रहीं। उनके शासनकाल की समृद्धि का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय किसान लगान के रूप में सोने की मोहरें और हाथी दिया करते थे। उन्होंने ऐसा सुशासन स्थापित किया था कि अकाल जैसी परिस्थितियों में भी कोई भूखा नहीं रहता था।
मुख्यमंत्री ने बताया कि मदन महल के पास लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से एक भव्य संस्थान का निर्माण किया जा रहा है, जो रानी दुर्गावती के गौरवशाली इतिहास और बलिदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि जबलपुर एयरपोर्ट का नाम रानी दुर्गावती के नाम पर रखने का प्रस्ताव भारत सरकार तक पहुंचाया जाएगा।
किसानों के हित में बड़ा ऐलान करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब 31 मार्च तक ऋण चुकाने की बाध्यता समाप्त होगी और किसानों को पूरा एक वर्ष का समय मिलेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि किसानों को दो गुना नहीं, चार गुना मुआवजा देना पड़े, तब भी सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।
डॉ. यादव ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का उल्लेख करते हुए कहा कि पहली बार एक आदिवासी महिला को देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचाने का कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी ने किया है। उन्होंने कहा कि “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” केवल नारा नहीं, बल्कि सरकार का संकल्प है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि रानी दुर्गावती के जीवन से प्रेरणा लेकर देश और प्रदेश के हर घर से ऐसी वीरांगनाएं निकलें, यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।










