“कांग्रेस में ‘विभीषण’ कौन? कैलाश विजयवर्गीय के बड़े खुलासे से मचा सियासी भूचाल”
भोपाल। मध्यप्रदेश में कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। एक तरफ कांग्रेस इसे लोकतंत्र पर हमला बता रही है, तो दूसरी तरफ बीजेपी इसे नियमों के तहत हुई कार्रवाई बता रही है। लेकिन अब प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है।
कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया है कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ मिली जानकारी बीजेपी को कांग्रेस के भीतर से ही उपलब्ध कराई गई थी। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस के अंदरूनी मतभेद और गुटबाजी को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
“कांग्रेस विधायकों को लंदन भी ले जाती तो हम जीतते”
मीडिया से बातचीत में विजयवर्गीय ने कहा कि कांग्रेस अपने विधायकों को बेंगलुरु या लंदन कहीं भी ले जाती, फिर भी बीजेपी चुनाव जीतती। उन्होंने कहा कि बीजेपी के पास पहले से कोई दस्तावेज या जानकारी नहीं थी, लेकिन जो तथ्य सामने आए, वे कांग्रेस के ही लोगों के जरिए पहुंचे।
“हमें कांग्रेस के लोगों ने ही जानकारी दी”
विजयवर्गीय ने कहा, “हमें जो कागज मिले वो कहां से मिले, किसने दिए? तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार है और वहीं से हमारे पास दस्तावेज पहुंचे। हमारे पास तो कोई जानकारी थी नहीं। हमें कांग्रेस के लोगों ने ही जानकारी दी होगी।”
इस बयान ने कांग्रेस की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर कांग्रेस के अंदर ऐसा कौन है जिसने अपनी ही पार्टी की राज्यसभा प्रत्याशी के खिलाफ जानकारी बाहर पहुंचाई?
कांग्रेस पर उठे गंभीर सवाल
विजयवर्गीय के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान ने ही मीनाक्षी नटराजन का राजनीतिक खेल बिगाड़ दिया? क्या पार्टी के भीतर ही किसी ने विरोधी खेमे को दस्तावेज मुहैया कराए?
बीजेपी का हमला, कांग्रेस की चुप्पी
बीजेपी अब इस मुद्दे को कांग्रेस की आंतरिक कलह और संगठनात्मक कमजोरी से जोड़कर हमला बोल रही है। वहीं कांग्रेस अभी तक इस आरोप पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाई है।
सबसे बड़ा सवाल
अगर बीजेपी के दावे सही हैं तो कांग्रेस के भीतर का “विभीषण” कौन है? और यदि आरोप गलत हैं, तो कांग्रेस इस पर कानूनी या राजनीतिक जवाबी कार्रवाई क्यों नहीं कर रही?
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने का मामला अब सिर्फ चुनावी विवाद नहीं रहा, बल्कि कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और संगठनात्मक एकजुटता पर भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है। कैलाश विजयवर्गीय के बयान ने इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक विस्फोटक बना दिया है।








