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“जज की बेटी, सुरक्षित भोपाल और सरकारी पंखा: जब न्याय के घर में ही घुट गया IPS की बेटी का दम, उठ रहे कई तीखे सवाल!”

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भोपाल का वीआईपी इलाका, जज मां, आईपीएस पिता… फिर भी कानून के पहरेदारों के बीच ‘खामोश’ हो गई एक मासूम जिंदगी!

भोपाल।

सत्ता और रसूख के सबसे सुरक्षित गलियारे कहे जाने वाले भोपाल के पॉश इलाके ‘चार इमली’ से एक ऐसी दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे प्रशासनिक और न्यायिक अमले को हिलाकर रख दिया है। सुरक्षा के चाक-चौबंद घेरे में रहने वाले एक सीनियर आईपीएस (IPS) अफसर संजीव कंचन की 17 वर्षीय नाबालिग बेटी का शव मंगलवार दोपहर को फांसी के फंदे पर लटका मिला।

सवाल यह उठता है कि जिस शहर और जिस इलाके में आम जनता की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं कानून के दो सबसे बड़े स्तंभों—एक आईपीएस पिता और गैस राहत अदालत में जज मां—के घर के भीतर ऐसा क्या खौफनाक चल रहा था कि 11वीं कक्षा की एक मासूम छात्रा को मौत का फंदा चूमना पड़ा?

बंद कमरा, गायब सुसाइड नोट और गहराते सवाल

हबीबगंज थाना प्रभारी संजीव चौकसे के मुताबिक, घटना की सूचना परिजनों द्वारा पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस को मृतका के पास से कोई भी सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, जिसने इस पूरे मामले को और अधिक रहस्यमयी बना दिया है। बुधवार को शव का पोस्टमॉर्टम कराकर उसे परिजनों को सौंप दिया गया है, और पुलिस शुरुआती तौर पर इसे आत्महत्या का मामला मानकर आगे बढ़ रही है।

आखिर उस मोबाइल में ऐसा क्या छिपा है?

पुलिस अब मृतका के सोशल मीडिया अकाउंट्स और उसके मोबाइल फोन को खंगाल रही है। कॉल डिटेल्स और चैट हिस्ट्री निकाली जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर वह कौन सी मानसिक प्रताड़ना या दबाव था, जिसने एक होनहार बच्ची को आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।

 

जब ‘न्याय’ और ‘सुरक्षा’ के घर में ही पसर गया मातम

यह घटना इस बात का कड़वा सबूत है कि अवसाद, मानसिक तनाव या सोशल मीडिया के अदृश्य खतरे किसी का स्टेटस देखकर नहीं आते। जो मां-बाप दुनिया को न्याय देते हैं और कानून व्यवस्था संभालते हैं, उनके अपने आशियाने के भीतर एक 17 साल की बच्ची घुट-घुट कर जी रही थी और किसी को भनक तक नहीं लगी।

क्या यह महज़ एक आत्महत्या है या फिर इसके पीछे डिप्रेशन, साइबर बुलिंग या किसी बाहरी दबाव का कोई गहरा जाल है? हाई-प्रोफाइल मामला होने के कारण पुलिस भले ही फूंक-फूंक कर कदम रख रही हो, लेकिन सिस्टम पर तीखे सवाल खड़े हो चुके हैं। जब वीआईपी जोन में रहने वाली एक जज और आईपीएस की बेटी सुरक्षित नहीं है, तो आम घरों की बेटियों के मानसिक तनाव और सुरक्षा को यह सिस्टम कैसे सुनिश्चि

त करेगा?

Tahalka Bharat
Author: Tahalka Bharat

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