राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका : मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज, लोकतंत्र पर छिड़ा सियासी संग्राम
भोपाल, मध्यप्रदेश। राज्यसभा चुनाव के बीच मध्यप्रदेश की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा खारिज किए जाने के बाद सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को “लोकतंत्र की हत्या” और विपक्ष की आवाज दबाने की साजिश बताया है, जबकि बीजेपी इसे चुनावी नियमों के तहत हुई वैधानिक कार्रवाई बता रही है।
राज्यसभा की तीन सीटों के लिए हो रहे चुनाव में दो सीटों पर बीजेपी की जीत पहले से तय मानी जा रही थी। तीसरी सीट पर बीजेपी ने महेश केवट को मैदान में उतारा था, जिनका मुकाबला कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन से था। लेकिन नामांकन खारिज होने के बाद अब महेश केवट का राज्यसभा पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है।
बंद कमरे में क्या हुआ?
सूत्रों के अनुसार, नामांकन पत्रों की जांच के दौरान बीजेपी की ओर से मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई गई। आरोप लगाया गया कि उन्होंने तेलंगाना की एक अदालत में दर्ज प्रकरण की जानकारी अपने नामांकन पत्र में पूरी तरह से नहीं दी। आपत्ति पर लंबी सुनवाई हुई और रिटर्निंग ऑफिसर ने दस्तावेजों की जांच के बाद नामांकन निरस्त करने का फैसला सुनाया।
कानूनी नियमों का हवाला
चुनावी नियमों के अनुसार प्रत्याशी को अपने खिलाफ दर्ज सभी लंबित मामलों और आवश्यक जानकारियों का खुलासा करना होता है। यदि किसी महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाया जाता है या गलत जानकारी दी जाती है तो नामांकन निरस्त किया जा सकता है। इसी आधार पर कार्रवाई किए जाने की बात सामने आ रही है।
कांग्रेस का हमला
कांग्रेस नेताओं ने फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह केवल एक उम्मीदवार का नामांकन खारिज नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सीधा हमला है। कांग्रेस का आरोप है कि सत्ता के दबाव में विपक्षी उम्मीदवार को चुनावी मैदान से बाहर करने की कोशिश की गई है।
बीजेपी का पलटवार
वहीं बीजेपी का कहना है कि चुनाव आयोग और रिटर्निंग ऑफिसर ने पूरी प्रक्रिया कानून के अनुसार पूरी की है। बीजेपी नेताओं का दावा है कि नियम सभी के लिए समान हैं और यदि किसी उम्मीदवार ने आवश्यक जानकारी छिपाई है तो कार्रवाई होना स्वाभाविक है।
सबसे बड़ा सवाल
अब प्रदेश की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ऐसा कौन-सा तथ्य था जिसने कांग्रेस की उम्मीदवार का पूरा नामांकन ही रद्द करा दिया? क्या यह केवल तकनीकी त्रुटि थी या चुनावी घोषणा पत्र में गंभीर जानकारी छिपाने का मामला? और सबसे अहम, क्या कांग्रेस इस फैसले को अदालत में चुनौती देगी?
राज्यसभा चुनाव के बीच उठे इस विवाद ने मध्यप्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। एक तरफ कांग्रेस इसे लोकतंत्र पर प्रहार बता रही है, तो दूसरी ओर बीजेपी इसे कानून की जीत करार दे रही है। लेकिन बंद कमरे में हुई जांच और नामांकन निरस्तीकरण का यह फैसला आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा कर सकता है।








