
सिंगरौली। जिले में संचालित जी-रामजी योजना (पूर्व में मनरेगा) को लेकर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दावा किया है कि योजना के तहत AI-जनरेटेड फर्जी मजदूरों की तस्वीरें पोर्टल पर अपलोड कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

सिंघार ने मीडिया से चर्चा में कहा कि भाजपा सरकार योजनाओं के नाम बदलने की राजनीति कर रही है, लेकिन नाम बदलने से जमीनी हकीकत नहीं बदलती। उनके अनुसार, यदि योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही तय नहीं की गई, तो गरीबों के सशक्तिकरण के बजाय सरकारी धन की लूट जारी रहेगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि सिंगरौली में 120 से अधिक फर्जी AI-जनरेटेड तस्वीरों के जरिए भुगतान निकाला गया है, जबकि वास्तविक मजदूरों को पूरी मजदूरी नहीं मिल रही। कुछ मामलों में कथित रूप से 10 प्रतिशत कमीशन की मांग की भी शिकायतें सामने आई हैं। सिंघार ने इसे सरकार के सुशासन के दावों पर सवाल बताते हुए कहा कि मजदूरों के हक पर डाका डालने वालों को संरक्षण मिल रहा है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मनरेगा जैसी योजनाएं गरीब मजदूरों के सम्मान और रोजगार का माध्यम होनी चाहिए, न कि भ्रष्टाचार का जरिया। उन्होंने मुख्यमंत्री से त्वरित कार्रवाई करते हुए दोषियों पर कठोर कदम उठाने की मांग की है, ताकि मजदूरों का हक सुरक्षित रहे और योजनाओं में विश्वास कायम हो सके।
हालांकि, इस मामले में अभी तक प्रशासन या राज्य सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि या खंडन स्पष्ट हो सकेगा।










