वराह अवतार ने किया पृथ्वी का उद्धार, धर्म की पुनर्स्थापना का दिया संदेश
तीन दिवसीय पृथ्वी उद्धारक वराह पुराण कथा का भव्य समापन | साध्वी महामंडलेश्वर अन्नपूर्णा गिरी ने कहा—‘हमारे संस्कार विचारों से आते हैं’
धार। श्रावण मास के पावन अवसर पर सनातन प्रहरी के तत्वावधान में स्थानीय कृषि उपज मंडी प्रांगण में आयोजित तीन दिवसीय पृथ्वी उद्धारक वराह पुराण कथा का रविवार को श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में भव्य समापन हुआ। कथा का रसपान साध्वी महामंडलेश्वर अन्नपूर्णा गिरी (वर्षा नागर) ने अपने मुखारविंद से कराया। कथा के अंतिम दिवस बड़ी संख्या में मातृशक्ति एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

साध्वी महामंडलेश्वर अन्नपूर्णा गिरी ने भगवान विष्णु के वराह अवतार का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान विष्णु ने सत्ययुग में पृथ्वी की रक्षा और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए वराह रूप धारण किया था। उन्होंने बताया कि हिरण्याक्ष ने कठोर तपस्या कर अपार शक्तियां प्राप्त कर तीनों लोकों में आतंक मचा दिया था। अहंकार में उसने माता पृथ्वी को रसातल में छिपा दिया, जिससे संपूर्ण सृष्टि संकट में पड़ गई।
उन्होंने कहा कि पृथ्वी के उद्धार के लिए भगवान विष्णु ने वराह अवतार धारण किया और समुद्र की गहराइयों में जाकर माता पृथ्वी को बाहर निकाला। इसी दौरान भगवान वराह और हिरण्याक्ष के बीच युद्ध हुआ, जिसमें भगवान ने अत्याचारी हिरण्याक्ष का अंत कर पृथ्वी को पुनः उसके स्थान पर स्थापित किया। इसके साथ ही सृष्टि में जीवन, वनस्पति और मानव सभ्यता के पुनः फलने-फूलने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
साध्वीजी ने कहा कि “हमारे संस्कार हमारे विचारों से आते हैं। जैसे हमारे विचार होंगे, वैसे ही हमारे कर्म और जीवन की दिशा होगी।” उन्होंने श्रद्धालुओं से सनातन संस्कृति, धर्म और संस्कारों को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।
कथा के समापन अवसर पर मुख्य यजमान सत्यनारायण रघुवंशी एवं सनातन प्रहरी के संयोजक जगदीश जाट ने समिति सदस्यों के साथ साध्वीजी का स्वागत किया। इस अवसर पर पंडित गोटू शुक्ला, राजेंद्र शर्मा, आशीष बसु, अंशुल शर्मा, रतन गिरी गोस्वामी एवं पत्रकार संजय शर्मा सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे। व्यासपीठ का पूजन कर विधिवत महाआरती की गई। महाआरती के दौरान पूरा परिसर भक्ति और जयकारों से गूंज उठा।










