भोपाल/मध्य प्रदेश:
कांवड़ यात्रा पर घमासान: पूर्व CM दिग्विजय सिंह के बयान पर BJP का तीखा पलटवार; विधायक रामेश्वर शर्मा बोले— ‘यह आस्था का पर्व, इसे राजनीति से न जोड़ें’
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से लेकर पूरे प्रदेश की राजनीति में कांवड़ यात्रा को लेकर उठा विवाद और गहरा गया है। पवित्र सावन मास में निकाली जाने वाली कांवड़ यात्रा को लेकर जारी बयानबाजी के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के हालिया रुख पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कड़ा एतराज जताया है।
क्या है पूरा विवाद?
सावन के दौरान निकाली जा रही कांवड़ यात्राओं में व्यवस्थाओं, हुड़दंग और छिटपुट घटनाओं को लेकर उठी बहस के बीच दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए एक वर्ग विशेष और कांवड़ यात्रा से जुड़े घटनाक्रमों की तुलना की थी। उनके इस बयान के बाद राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया और भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर सनातन धर्म और श्रद्धालुओं की आस्था का अपमान करने का आरोप लगा दिया।
विधायक रामेश्वर शर्मा का तीखा पलटवार
दिग्विजय सिंह के बयान पर करारा जवाब देते हुए हुजूर (भोपाल) से भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा:
“कांवड़ यात्रा किसी एक राजनीतिक दल, संगठन या भारतीय जनता पार्टी की यात्रा नहीं है। यह सनातन धर्म, हिंदू आस्था और भगवान शिव शंभू के प्रति करोड़ों शिवभक्तों की अगाध भक्ति का पावन प्रतीक है। इसे राजनीति से जोड़कर देखना पूरी तरह गलत है।”
रामेश्वर शर्मा ने आगे कहा कि करोड़ों शिवभक्त पूरे नियम, निष्ठा और कठिन पदयात्रा के साथ पवित्र नदियों का जल लाकर भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। कांग्रेस और उसके नेता लगातार ऐसे आयोजनों को निशाना बनाकर हिंदू धार्मिक भावनाओं को आहत करने का प्रयास करते हैं, जिसे जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का नजरिया
भाजपा का रुख: भाजपा का स्पष्ट तर्क है कि धार्मिक अनुष्ठानों को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर सवाल उठाना तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा है।
कांग्रेस का रुख: दूसरी तरफ, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उनकी मंशा किसी की धार्मिक भावनाएं आहत करना नहीं, बल्कि सर्वधर्म समभाव और प्रशासनिक व्यवस्था में समानता की बात उठाना है।
राजधानी भोपाल से उठी इस जुबानी जंग ने राज्य में एक बार फिर आस्था बनाम राजनीति की बहस छिड़ दी है। जहां एक ओर कांवड़िए जलाभिषेक के लिए पैदल मार्गों पर निकल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस मुद्दे पर वार-पलटवार का दौर चरम पर है।









