उज्जैन – प्राचीन नगरी उज्जैन आध्यात्मिक पर्यटन का केंद्र बनी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दीप प्रज्ज्वलित कर द्वितीय वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर वीर दुर्गादास की छत्री पर संरक्षण एवं विकास कार्यों का भूमिपूजन भी किया गया। सम्मेलन का आयोजन पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI), पर्यटन मंत्रालय और मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के सहयोग से होटल अंजुश्री में हुआ। इसमें देश-विदेश से 300 से अधिक संत, विचारक और प्रतिनिधि शामिल हुए।

धार्मिक पर्यटन की बढ़ती ताकत
पीएचडीसीसीआई अध्यक्ष संजीव अग्रवाल ने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक पहचान बनाने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने आग्रह किया कि आगामी सिंहस्थ-2028 में भी संस्था को जोड़ा जाए। पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि धार्मिक पर्यटन 20% की दर से बढ़ रहा है। भारत की जीडीपी का 2.5% हिस्सा केवल आध्यात्मिक पर्यटन से आता है, जिसे बढ़ाकर 13% तक किया जा सकता है। पर्यटन समिति अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने कहा कि भारत अब दुनिया का प्रमुख टूरिज्म सेंटर बन रहा है। पिछले कुंभ में 64 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आए थे। सरकार घाट, हेलीपैड और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से काम कर रही है।

सिंहस्थ 2028 पर फोकस
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सिंहस्थ 2028 की तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। संरचनात्मक विकास के साथ कम्युनिटी डेवलेपमेंट भी प्राथमिकता में है।

प्रमुख सत्र
सम्मेलन में ‘ज्योतिर्लिंग सर्किट’, ‘मंदिर अर्थव्यवस्थाएं’, ‘महाकाल का मंडल’, ‘योग-आयुर्वेद व वेलनेस’, और ‘डिजिटल में दिव्य’ जैसे विषयों पर मंथन होगा। प्रतिनिधि महाकालेश्वर और काल भैरव मंदिर के दर्शन भी करेंगे। इस दौरान पीएचडीसीसीआई-केपीएमजी की रिपोर्ट “आस्था और प्रवाह: भारत के पवित्र स्थलों में जनसमूह का मार्गदर्शन” का विमोचन किया गया। यह सम्मेलन न केवल आध्यात्मिक पर्यटन को नई दिशा देगा, बल्कि उज्जैन को वैश्विक धार्मिक मानचित्र पर और मजबूत पहचान दिलाएगा।










