MP Politics : मध्य प्रदेश में नियुक्तियों का महाभियान, संगठन से लेकर निगम-मंडलों तक होगा बड़ा फेरबदल 
भोपाल। मध्य प्रदेश की सियासत में आने वाले तीन-चार महीने बेहद हलचल भरे रहने वाले हैं। राज्य की सत्ता और संगठन में ‘ताबड़तोड़’ नियुक्तियों की तैयारी पूरी हो चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच लगातार हो रहे मंथन के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही कार्यकर्ताओं और नेताओं के सब्र का फल मिलने वाला है।
दिल्ली से हरी झंडी: ‘टुकड़ों में नहीं, एक साथ हो नियुक्तियां’
सूत्रों के मुताबिक, इससे पहले तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को करीब 15 प्राधिकरणों और निगमों के अध्यक्षों के नामों की सूची भेजी गई थी। हालांकि, केंद्रीय नेतृत्व ने यह कहते हुए सूची वापस कर दी थी कि नियुक्तियां टुकड़ों में करने के बजाय जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक की पूरी फेहरिस्त एक साथ तैयार की जाए।
अब जबकि नितिन नवीन भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं, मध्य प्रदेश संगठन ने अपनी कवायद तेज कर दी है। नई दिल्ली की टीम में भी एमपी के दिग्गजों को जगह मिलने की पूरी संभावना है।
केंद्रीय टीम में शामिल हो सकते हैं ये चेहरे
राष्ट्रीय संगठन में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए कई बड़े नामों पर विचार चल रहा है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
कविता पाटीदार
गजेंद्र पटेल
लाल सिंह आर्य
कमल पटेल
अरविंद भदौरिया
निगम-मंडल और प्राधिकरण : इन दिग्गजों पर टिकी निगाहें
सबसे ज्यादा उत्साह राज्य के प्रमुख शहरों के विकास प्राधिकरणों और निगम-मंडलों को लेकर है। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर जैसे महानगरों के प्राधिकरणों में नियुक्तियां प्रस्तावित हैं।
चर्चाओं में शामिल प्रमुख नाम:
| नेता का नाम | संभावित भूमिका |
| चेतन सिंह चौहान, शशांक श्रीवास्तव | निगम/मंडल अध्यक्ष |
| शैलेंद्र शर्मा, राघवेंद्र शर्मा | प्राधिकरण/बोर्ड |
| आशीष अग्रवाल, केपी त्रिपाठी | प्रदेश स्तरीय नियुक्तियां |
| श्याम बंसल, दीपक सक्सेना | संगठन एवं बोर्ड |
| संजय नगाइच, सतेंद्र भूषण सिंह | महत्वपूर्ण आयोग |
| गिरीश द्विवेदी, वीरेंद्र गोयल, अखिलेश जैन | जिला एवं संभाग स्तरीय जिम्मेदारी |
कार्यकर्ताओं को ‘एडजस्ट’ करने की चुनौती
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और युवा कार्यकर्ताओं के जोश के बीच संतुलन बनाना है। जिला कार्यसमिति से लेकर प्रदेश कार्यसमिति तक में व्यापक बदलाव के संकेत हैं, ताकि आगामी चुनावों से पहले संगठन को नई ऊर्जा दी जा सके।
निष्कर्ष: मध्य प्रदेश भाजपा में यह नियुक्तियां न केवल नेताओं को ‘एडजस्ट’ करने का जरिया हैं, बल्कि यह डॉ. मोहन यादव की सत्ता पर पकड़ और संगठन के नए समीकरणों को भी परिभाषित करेंगी।










