Search
Close this search box.

भोपाल में प्लॉट रजिस्ट्री घोटाला : एक ही जमीन कई लोगों के नाम, EOW की FIR की तैयारी

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

विशेष खबर | सबसे पहले भोपाल से

राजधानी भोपाल में प्लॉट रजिस्ट्री का बड़ा खेल! एक ही जमीन कई लोगों को बेचने का आरोप, EOW की जांच के बाद FIR की तैयारी

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से जमीन की रजिस्ट्रियों से जुड़ा एक बड़ा और गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि दस्तावेजों में कथित हेरफेर कर एक ही प्लॉट की रजिस्ट्री कई लोगों के नाम कर दी गई और खरीदारों से लाखों रुपये वसूल लिए गए। मामले में दलालों, दस्तावेज तैयार करने वाले लोगों और कुछ सरकारी कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में बताई जा रही है। कई पीड़ितों ने स्थानीय पुलिस थानों में शिकायतें दीं, लेकिन महीनों बीत जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद पीड़ितों ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) का दरवाजा खटखटाया। सूत्रों के अनुसार, EOW ने प्रारंभिक जांच पूरी कर ली है और इस मामले में आधा दर्जन से अधिक आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी चल रही है।

 

क्या है पूरा मामला?

 

यह मामला भोपाल जिले की तहसील हुजूर के ग्राम पलासी स्थित खसरा क्रमांक 104 एवं 105/2 की भूमि से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि लगभग 600 वर्गफीट के प्लॉटों की रजिस्ट्री अलग-अलग लोगों के नाम कर दी गई। यानी जिस जमीन का एक बार विक्रय हो चुका था, उसी जमीन के दस्तावेजों का उपयोग कर अन्य लोगों के नाम भी रजिस्ट्रियां कराई गईं।

पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने वर्षों पहले विधिवत पंजीकृत दस्तावेजों के आधार पर प्लॉट खरीदे थे और तब से लगातार उनका कब्जा भी बना हुआ था। लेकिन अचानक कुछ लोगों ने मौके पर पहुंचकर मिट्टी डालना शुरू किया और बोर्ड लगाकर कब्जा करने का प्रयास किया।

 

पीड़ितों का दावा

 

शिकायतकर्ता सुनील कुमार बाथम और अनिल कुमार बाथम ने अपने आवेदन में बताया है कि उन्होंने वर्ष 1999 में ग्राम पलासी स्थित प्लॉट क्रमांक 30 की विधिवत रजिस्ट्री कराई थी। रजिस्ट्री के बाद से वे लगातार उस भूमि पर कब्जे में थे।

 

उनके अनुसार 2 सितंबर 2025 को सुबह जब वे अपने प्लॉट पर पहुंचे तो कुछ लोगों द्वारा वहां मलबा डालकर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा था। उनके अनुसार पास स्थित प्लॉट क्रमांक 31 पर भी इसी प्रकार कब्जे की कोशिश की गई, जिसकी रजिस्ट्री भजनलाल जाटव के नाम बताई गई है।

 

पीड़ितों का आरोप है कि यह पूरा घटनाक्रम सुनियोजित तरीके से किया गया और बाद में जानकारी मिली कि उसी भूमि की अन्य लोगों के नाम भी रजिस्ट्रियां कराई जा चुकी हैं।

 

दस्तावेजों में हेरफेर के आरोप

 

शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि मुख्तारनामा और अन्य दस्तावेजों का कथित दुरुपयोग कर कई फर्जी रजिस्ट्रियां कराई गईं। पीड़ितों का कहना है कि जिन प्लॉटों पर वर्षों से उनका कब्जा था, उन्हीं पर अब दूसरे लोगों के अधिकार बताए जा रहे हैं।

 

यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल धोखाधड़ी का मामला नहीं बल्कि सरकारी अभिलेखों में कथित छेड़छाड़, जालसाजी और संगठित आर्थिक अपराध की श्रेणी में भी आ सकता है।

 

पुलिस की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल

 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पीड़ितों ने पुलिस में शिकायतें दीं तो महीनों तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

 

पीड़ितों का आरोप है कि कई बार आवेदन देने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसी कारण उन्हें EOW का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

 

अब सूत्रों के अनुसार EOW ने पूरे मामले की जांच के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी है।

 

EOW की कार्रवाई

 

सूत्रों के अनुसार—

 

 

प्रारंभिक जांच पूरी हो चुकी है।

 

7 से 8 लोगों को आरोपी बनाए जाने की तैयारी है।

 

जल्द एफआईआर दर्ज हो सकती है।

 

जांच आगे बढ़ने पर अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

 

आवश्यकता पड़ने पर सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच हो सकती है।

 

 

 

(इन बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि एफआईआर दर्ज होने के बाद ही होगी।)

 

किन लोगों के नाम चर्चा में?

 

शिकायत और उपलब्ध दस्तावेजों में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें कथित रूप से—

 

 

कासिम अज़ीम

 

परवेज़ अख्तर हाशमी उर्फ आफताब

 

मेहताब उर्फ शोएब अनवर हाशमी

 

शोहेल उद्दीन

 

मतबल खान

 

पटवारी सुरेंद्र सिंह राजपूत

 

 

 

महत्वपूर्ण: इन व्यक्तियों के नाम शिकायतों और जांच से जुड़ी जानकारी में सामने आए हैं। किसी भी व्यक्ति का दोष न्यायालय अथवा सक्षम जांच एजेंसी द्वारा सिद्ध होना अभी शेष है।

 

अगर आरोप सही साबित हुए तो कौन-कौन सी धाराएं लग सकती हैं?

 

ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा अन्य संबंधित कानूनों के अंतर्गत धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, आपराधिक षड्यंत्र, विश्वासभंग और सरकारी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ जैसी धाराओं में कार्रवाई की जा सकती है। अंतिम धाराएं जांच एजेंसी तथ्यों के आधार पर तय करती है।

 

न्यायालय ऐसे मामलों को कैसे देखता है?

 

भारतीय न्यायालय समय-समय पर अपने फैसलों में स्पष्ट कर चुके हैं कि—

 

 

किसी व्यक्ति की संपत्ति पर धोखाधड़ी कर कब्जा करना गंभीर अपराध है।

 

फर्जी दस्तावेज बनाकर संपत्ति बेचना संगठित अपराध की श्रेणी में माना जा सकता है।

 

सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जा सकती है।

 

यदि सरकारी अधिकारी की मिलीभगत सिद्ध होती है तो उसके विरुद्ध भी आपराधिक कार्रवाई संभव है।

 

पीड़ित व्यक्ति दीवानी (सिविल) और आपराधिक (क्रिमिनल) दोनों प्रकार की कानूनी कार्रवाई कर सकता है।

 

 

 

सबसे बड़ा सवाल

 

यदि राजधानी भोपाल में वर्षों पुरानी रजिस्ट्रियों वाली जमीन भी सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक अपनी जीवनभर की कमाई किस भरोसे जमीन में लगाए?

 

क्या कारण है कि शिकायतों के बाद भी समय पर कार्रवाई नहीं हुई?

 

क्या संबंधित विभागों की जवाबदेही तय होगी?

 

यदि जांच में सरकारी कर्मचारियों की भूमिका सामने आती है तो क्या उनके खिलाफ भी समान कानूनी कार्रवाई होगी?

 

गरीब की जिंदगी भर की कमाई पर संकट

 

देश का एक सामान्य परिवार वर्षों की बचत के बाद छोटा-सा प्लॉट खरीदता है ताकि भविष्य में अपना घर बना सके। यदि उसी जमीन की दोबारा रजिस्ट्री हो जाए या उस पर कब्जे का विवाद खड़ा हो जाए, तो सबसे अधिक नुकसान उसी परिवार को होता है।

 

ऐसे मामलों में पीड़ित वर्षों तक थानों, कार्यालयों और अदालतों के चक्कर काटता है। आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ती है। इसलिए जमीन से जुड़े अपराध केवल वित्तीय धोखाधड़ी नहीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन और भविष्य पर सीधा हमला माने जाते हैं।

 

अब निगाहें EOW की कार्रवाई पर

 

फिलहाल पूरे मामले में सबकी नजर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की अगली कार्रवाई पर टिकी है। यदि एफआईआर दर्ज होती है तो यह राजधानी भोपाल के चर्चित भूमि घोटालों में एक महत्वपूर्ण मामला बन सकता है। जांच आगे बढ़ने पर यह भी स्पष्ट होगा कि यह केवल कुछ व्यक्तियों की करतूत थी या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।

 

अंतिम सत्य जांच एजेंसियों और न्यायालय के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।

Tahalka Bharat
Author: Tahalka Bharat

Leave a Comment

और पढ़ें