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ऐतिहासिक धरोहर देवरा का प्राचीन शिव मंदिर संरक्षण के इंतजार में

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सर्वे हुआ, उम्मीद जगी… लेकिन संरक्षण अब भी अधूरा…? 

पुरातत्व विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज देवरा का परमारकालीन शिव मंदिर उपेक्षा का शिकार, सर्वे के दो साल बाद भी कार्रवाई का इंतजार

संजय यादव रिपोटर…

मनावर (धार)। नगर से करीब 15 किलोमीटर दूर ग्राम देवरा में स्थित परमारकालीन प्राचीन शिव मंदिर आज भी संरक्षण के अभाव में अपनी पहचान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। 28 अगस्त 2024 को पुरातत्व विभाग द्वारा मंदिर का विस्तृत सर्वेक्षण किए जाने के बाद क्षेत्रवासियों को उम्मीद थी कि जल्द ही इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण, सुरक्षा और जीर्णोद्धार की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। लेकिन समय बीतने के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सर्वे के बाद न तो मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई और न ही स्थायी सूचना बोर्ड लगाया गया। विभाग द्वारा लगाया गया अस्थायी फ्लेक्स बोर्ड भी अब क्षतिग्रस्त हो चुका है। ऐसे में सदियों पुरानी इस अमूल्य धरोहर की सुरक्षा को लेकर लोगों में गहरी चिंता और निराशा है।

 

इतिहास की गवाही देता है देवरा का शिव मंदिर

 

क्षेत्रीय मान्यताओं के अनुसार यह शिव मंदिर परमारकालीन है और अपने समय में अत्यंत भव्य स्वरूप में स्थापित था। स्थानीय जनश्रुति यह भी बताती है कि मंदिर का विशाल शिखर कभी दूरस्थ मांडव क्षेत्र से भी दिखाई देता था। हालांकि इन ऐतिहासिक तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि पुरातत्व विभाग द्वारा किया जाना अभी शेष है।

 

कुछ वर्ष पूर्व पुरातत्व विभाग ने मंदिर परिसर में सफाई अभियान चलाकर मलबे से प्राचीन शिवलिंग, जलाधारी, शिलाखंड एवं अन्य पुरातात्विक अवशेष बाहर निकाले थे। आज भी परिसर में मौजूद ये अवशेष मंदिर की प्राचीनता और स्थापत्य वैभव की स्पष्ट झलक प्रस्तुत करते हैं।

 

श्रद्धा और आस्था का भी प्रमुख केंद्र

 

देवरा का यह प्राचीन शिव मंदिर केवल ऐतिहासिक धरोहर ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की आस्था का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। बालीपुर धाम के ब्रह्मलीन संत श्री गजाननजी महाराज ने भी यहां विराजित प्राचीन शिवलिंग के दर्शन कर श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना के लिए प्रेरित किया था। इसके बाद विशेष रूप से श्रावण मास में बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

 

क्षेत्रवासियों की प्रमुख मांगें

 

मंदिर परिसर में स्थायी सूचना बोर्ड लगाया जाए।

– सुरक्षा के लिए चौकीदार की नियुक्ति की जाए।

– प्राचीन मूर्तियों एवं पुरातात्विक अवशेषों का वैज्ञानिक संरक्षण किया जाए।

– विशेषज्ञों की देखरेख में विस्तृत अध्ययन और जीर्णोद्धार की कार्ययोजना बनाई जाए।

– देवरा के प्राचीन शिव मंदिर को धार्मिक एवं ऐतिहासिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए।

 

सबसे बड़ा सवाल

 

जब पुरातत्व विभाग 28 अगस्त 2024 को मंदिर का सर्वेक्षण कर चुका है, तो फिर इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और जीर्णोद्धार की ठोस प्रक्रिया आखिर कब शुरू होगी?

आज भी क्षेत्रवासियों की निगाहें शासन और पुरातत्व विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते संरक्षण नहीं किया गया, तो इतिहास की यह अमूल्य धरोहर धीरे-धीरे क्षरण का शिकार होती चली जाएगी।

Tahalka Bharat
Author: Tahalka Bharat

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