गौचर भूमि पर उद्योग विभाग का कब्जा? विश्व हिन्दू परिषद का सवाल—’अब गौ माता जाएगी कहाँ?’
धार। धार जिले के ग्राम जेतपुरा स्थित प्रकृति वात्सल्य गौशाला की गौचर भूमि को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। गौशाला प्रबंधन और विश्व हिन्दू परिषद ने आरोप लगाया है कि उद्योग विभाग ने गौचर भूमि पर कब्जा कर औद्योगिक प्लॉटिंग शुरू कर दी है, जिससे गौवंश के संरक्षण पर संकट खड़ा हो गया है। मामले को लेकर गौ भक्तों में आक्रोश है और प्रशासन को आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
विश्व हिन्दू परिषद के धार नगर मंत्री योगेश पाल ने कहा कि लोग अक्सर कहते हैं कि गौवंश सड़कों पर नहीं घूमना चाहिए, लेकिन यदि गौशालाओं की गौचर भूमि ही खत्म कर दी जाएगी तो बेसहारा, दुर्घटनाग्रस्त और वृद्ध गायों को आखिर रखा कहाँ जाएगा। उन्होंने कहा कि यह किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि गौ माता की जमीन है और इस पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण स्वीकार नहीं किया जाएगा।
गौशाला प्रबंधन का आरोप है कि सर्वे क्रमांक 756 की गौचर भूमि का भूमि उपयोग पीएसपी (पब्लिक एवं सेमी पब्लिक) है। नियमों के अनुसार भूमि उपयोग परिवर्तन किए बिना उद्योग विभाग द्वारा यहां औद्योगिक विकास के लिए प्लॉटिंग की जा रही है, जो पूरी तरह नियमों के विपरीत है।
विवाद बढ़ने पर कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम और तहसीलदार राजस्व अमले के साथ मौके पर पहुंचे और विवादित भूमि का निरीक्षण किया। इस दौरान प्रकृति वात्सल्य गौशाला के अध्यक्ष धर्मेंद्र जोशी, विश्व हिन्दू परिषद के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में गौ भक्त मौजूद रहे।
गौशाला प्रबंधन का कहना है कि वर्तमान में गौशाला में करीब 270 गौवंश संरक्षित हैं, जिनमें अधिकांश दुर्घटनाग्रस्त, बीमार और वृद्ध गायें हैं। यदि गौचर भूमि पर अतिक्रमण जारी रहा तो इन पशुओं के पालन-पोषण और चारे की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाएगी।
विश्व हिन्दू परिषद ने प्रशासन से मांग की है कि उद्योग विभाग द्वारा किए गए कथित अतिक्रमण को तत्काल हटाया जाए। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो गौ भक्त और विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
नोट: यह खबर संबंधित पक्षों द्वारा लगाए गए आरोपों और दिए गए बयानों पर आधारित है। उद्योग विभाग का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।








