ब्रिक्स डेलीगेट्स के दिल में बसा भोपाल, झीलों की नगरी ने छोड़ी अमिट छाप

हेरिटेज वॉक से वन विहार तक दिखी मध्यप्रदेश की समृद्ध विरासत; शिकारा की सैर और बर्ड वॉचिंग बना यादगार अनुभव

भोपाल। झीलों की नगरी भोपाल इन दिनों अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के स्वागत और सांस्कृतिक संवाद का केंद्र बनी हुई है। ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल डेलीगेट्स ने भोपाल की ऐतिहासिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य, जैव-विविधता और आत्मीय मेहमाननवाजी का अनुभव किया। हेरिटेज वॉक, वन विहार नेशनल पार्क, बर्ड वॉचिंग और बड़े तालाब में शिकारा की सैर ने विदेशी मेहमानों को खासा प्रभावित किया।

मध्यप्रदेश पर्यटन की ओर से ब्रिक्स डेलीगेट्स के लिए विशेष भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया गया। हेरिटेज वॉक के दौरान प्रतिनिधियों ने गौहर महल, इकबाल मैदान और मोती मस्जिद की ऐतिहासिक विरासत और स्थापत्य कला को करीब से जाना। इसके बाद वन विहार नेशनल पार्क की जैव-विविधता ने उन्हें आकर्षित किया।

बड़े तालाब में शिकारा की सैर और बर्ड वॉचिंग डेलीगेट्स के लिए खास अनुभव रहा। प्रतिनिधियों ने भोपाल की प्राकृतिक खूबसूरती के साथ यहां मौजूद वन्यजीव और पक्षियों की विविधता की जमकर सराहना की। भ्रमण के दौरान चौक बाजार, नया बाजार और भोपाल हाट में स्थानीय हस्तशिल्प, खान-पान और संस्कृति की भी झलक देखने को मिली।

‘भोपाल की मेहमाननवाजी हमेशा याद रहेगी’
अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं संगठनों के महानिदेशक श्री हामिद मोस्तफवी ने भोपाल यात्रा को बेहद खूबसूरत और यादगार अनुभव बताया। वन विहार की प्राकृतिक संपदा और वैज्ञानिक महत्व की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यहां की वनस्पति और पक्षियों की विविधता पर्यटकों को सहज ही आकर्षित करती है।
भारत-ईरान के सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए मोस्तफवी ने हिंदी और फारसी भाषाओं में मौजूद समानताओं को दोनों देशों की साझा विरासत और मजबूत सांस्कृतिक संबंधों का प्रमाण बताया। उन्होंने भोपाल में मिले आत्मीय स्नेह और आतिथ्य के लिए आभार जताया।
प्राकृतिक विरासत बचाने का प्रयास दुनिया के लिए महत्वपूर्ण
ईरान के सांस्कृतिक मामलों के उप मंत्री के सलाहकार श्री अयूब देहघांकर ने वन विहार भ्रमण के दौरान मध्यप्रदेश आने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि पृथ्वी और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के लिए वन विहार में किए जा रहे प्रयास बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे प्रयासों का लाभ केवल किसी एक क्षेत्र को नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को मिलता है।

चीन के डेलीगेट बोले—मध्यप्रदेश ने मन मोह लिया
चीन से आए श्री हाइिलिंग ने भोपाल भ्रमण को अनूठा और यादगार अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि यहां प्राकृतिक सौंदर्य के साथ पक्षियों, सरीसृपों, बाघों और जैव-विविधता को करीब से जानने का अवसर मिला। उन्होंने स्थानीय मेजबानों की गर्मजोशी और पेशेवर मार्गदर्शन की भी सराहना की और दुनियाभर के पर्यटकों से मध्यप्रदेश की प्राकृतिक एवं वन्यजीव संपदा का अनुभव लेने का आग्रह किया।
ब्रिक्स डेलीगेट्स के अनुभवों ने एक बार फिर साबित किया कि भोपाल सिर्फ झीलों की नगरी नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति, प्रकृति और मेहमाननवाजी का अनूठा संगम है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के अनुभवों के जरिए मध्यप्रदेश की पर्यटन क्षमता और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिली है।
ब्रिक्स सम्मेलन की यह यात्रा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना को साकार करते हुए भारत और ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक एवं मानवीय संबंधों को और मजबूत करने वाली साबित हुई।








