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“सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना” से प्रदेश के छोटे निवेशकों को भी मिलेगा लाभ – मंत्री श्री शुक्ला…!

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अब मध्यप्रदेश में सरकार किसानों को दिन में देगी पर्याप्त बीजली…!
मध्यप्रदेश सरकार ने लिया कैबिनेट में बड़ा फैसला…!
“सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना”….!

“सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना” समिट 10 जून कोकिसान भी कर सकेंगे बिजली का उत्पादन…!
मध्यप्रदेश – सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना – ग्रिड से जुड़े हुए कृषि पम्पों को सौर ऊर्जा से बिजली देने के लिए फीडर पर सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना की प्रधानमंत्री कुसुम योजना का विस्तार शासन द्वारा निर्णय लिया गया है, कि राज्य कृषि क्षेत्र में देश में अग्रणी राज्य है यहाँ पर सिंचाई सुविधाओं के लिए लगभग 8000 पृथक कृषि फीडर्स स्थापित किये गए हैं जिन पर लगभग 35 लाख कृषि पम्प हैं। इन पृथक कृषि फीडर्स एवं मिश्रित फीडर्स भी जिन पर कृषि पम्प हैं को शीघ्र सौर ऊर्जा से बिजली देने के लिए फीडर पर सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना की जाए और इसलिए प्रधानमंत्री कुसुम योजना का विस्तार करते हुए सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना के अंतर्गत लक्ष्यों से अधिक सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना की जाए।
इन परियोजनाओं के मुख्य उद्धेश्य…
कृषि लोड का दिन में प्रबंध करना अर्थात किसान को सिंचाई के लिये दिन में बिजली उपलब्ध कराना ताकि उनकी जीवन शैली व्यवस्थित हो सके;
सीधे 11 किलोवोल्ट साईड पर बिजली देने से सबस्टेशन के सभी फीडरों को दिन में एक साथ बिजली दी जा सकेगी..!
इस व्यवस्था के लिए विद्युत सबस्टेशन के सुधार / नए ट्रांसफार्मर पर होने वाले तात्कालिक खर्चे कम हो सकेंगे…!
म.प्र.पावर मेनेज़मेंट कंपनी लिमिटेड को कम दर पर विद्युत उपलब्ध करवाना ताकि कृषि क्षेत्र में विद्युत सब्सिडी के भार हो सके…!
सीधे विद्युत खपत स्थल पर ऊर्जा प्रदाय कर पारेषण हानि को कम करना…!
33/11 किलोवोल्ट विद्युत वितरण उप- केन्द्रों पर स्थापित पावर ट्रांसफार्मर पर ओवर- लोडिंग. लो-वोल्टेज एवं पावर कट की समस्या कम करना;
रिएक्टिव पावर के उपयोग से ग्रिड स्टेबिलिटी का प्रबंधन किया जा सकेगा।
“सूर्य-मित्र कृषि फीडर”- क्रियान्वयन के मुख्य बिंदु –
योजना के अंतर्गत विद्युत् सब-स्टेशंस की 100 प्रतिशत क्षमता तक की सौर परियोजनाओं की स्थापना की जा सकेगी।
वोकलफार लोकल के अंतर्गत स्थानीय उद्यमियों के लिए निवेश एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।
शासन के साथ 25 वर्षों तक विद्युत् क्रय अनुबंध किया जाएगा।
वर्तमान में 1900 से अधिक सब-स्टेशंस पर 14500 मेगावाट क्षमता परियोजनाओं के
चयन हेतु उपलब्ध हैं।
परियोजनाओं को एग्रीकल्चर इन्फ्रा फंड से 7 वर्षों तक 3 प्रतिशत ब्याज में छूट का प्रावधान है।
परियोजनाओं की स्थापना उचित ढंग से हो सके, परियोजनाओं को सरलता से ऋण प्राप्त हो सके, स्थापना के बाद परियोजनाएं बेहतर से ढंग से संचालित हों ताकि अधिक से अधिक लाभ प्राप्त हो सके इसके लिये शासन ने बैंकों, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ एमओयू किये हैं।
विगत 4-8 जून के दौरान जीआईज़ेड के साथ प्रशिक्षण कार्यक्रम किया गया जिसमे 100 से अधिक विकासकों एवं संयंत्र स्थापना कर्ता ईकाईयों ने भाग लिया।
उपलब्धि एवं वर्तमान निविदा-
√ प्रदेश में अद्यतन 80 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं स्थापित की जा चुकी हैं, जिससे 16000 से अधिक कृषि पम्पों को सौर उर्जा से उर्जीकृत किया जा चुका है। 240 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं के विद्युत क्रय अनुबंध होकर स्थापनाधीन हैं एवं 200 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं प्रक्रियाधीन हैं। इस प्रकार इन 520 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं की स्थापना से एक लाख से अधिक कृषि पम्पों को
सौर उर्जा से उर्जीकृत किया जा सकेगा। √ पी एम् कुसुम योजनान्तर्गत 3.45 लाख पम्पस का लक्ष्य प्राप्त है। शेष 2.45 लाख पम्प के सोलाराईज़ेशन सहित “सूर्य-मित्र कृषि फीडर” के अतर्गत परियोजनाओं के विकासकों के चयन हेतु म.प्र. ऊर्जा विकास निगम द्वारा निविदा जारी की गयी है। जिसमें पी एम् कुसुम योजनान्तर्गत 1200 मेगावाट क्षमता तक की सौर परियोजनाओं को अनुदान प्राप्त करने का विकल्प होगा।
√ वोकलफार लोकल के अंतर्गत स्थानीय उद्यमियों के लिए निवेश एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।
√ परियोजना के विकासकों एवं अन्य स्टेकहोल्डर्स को निगम द्वारा इस निविदा, वित्तीय प्रबंधन, तकनीकी जानकारी देने की दृष्टि से सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना समिट आगामी 10 जून को कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशनल हाल में आयोजित किया जावेगा…!

Tahalka Bharat
Author: Tahalka Bharat

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