अवैध कमाई का पर्दाफाश: FCI क्लर्क ने 24% ब्याज पर दिए ₹95 लाख

भोपाल: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) भोपाल के सहायक ग्रेड-1, किशोर मीणा के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत कार्रवाई करते हुए मीणा की ₹4 करोड़ से अधिक की चल-अचल संपत्ति को जब्त कर लिया है।
💰 अवैध कमाई से बिल्डर को दिया कर्ज
जांच में सामने आया कि FCI क्लर्क किशोर मीणा ने अवैध रूप से अर्जित धन का इस्तेमाल किया था। जब्त की गई संपत्ति में यह भी पता चला कि मीणा ने इस अवैध कमाई में से ₹95 लाख की बड़ी रकम एक स्थानीय बिल्डर को 24 प्रतिशत सालाना ब्याज पर उधार दी थी। यह लेन-देन मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में आया, जिसके बाद ईडी ने सख्त कदम उठाया।
🗓️ कोर्ट से संज्ञान मिलने के बाद हुई कार्रवाई

यह कार्रवाई उस समय तेज हुई जब ईडी ने इस मामले में विशेष पीएमएलए (PMLA) कोर्ट में 3 मार्च 2025 को अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) दर्ज की थी। कोर्ट ने 5 दिसंबर 2025 को ईडी की शिकायत पर संज्ञान लिया, जिसके बाद आरोपी की संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
ईडी के अधिकारी: “यह कार्रवाई दिखाती है कि अवैध रूप से अर्जित धन को किसी भी रूप में छिपाने या निवेश करने वाले व्यक्तियों को बख्शा नहीं जाएगा। PMLA के तहत संपत्ति जब्त कर सरकारी खजाने में वापस लाने की प्रक्रिया जारी रहेगी।”
🔍 मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत संपत्ति जब्त

प्रवर्तन निदेशालय की यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और अवैध वित्तीय लेन-देन के खिलाफ सरकार की सख्ती को दर्शाती है। एफसीआई जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के एक क्लर्क द्वारा ₹4 करोड़ से अधिक की संपत्ति जमा करना और उसे ब्याज पर बिल्डर को देना गंभीर वित्तीय अनियमितता को उजागर करता है। ईडी ने PMLA के प्रावधानों के तहत यह सुनिश्चित किया है कि अपराध से अर्जित संपत्ति को फ्रीज और अंततः जब्त किया जाए।










