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“म्हारी बोली म्हारो वट” कार्यक्रम में गूंजी भीली संस्कृति, शारदा विद्या मंदिर में भारतीय भाषा दिवस पर हुआ भव्य आयोजन

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“म्हारी बोली म्हारो वट” कार्यक्रम में गूंजी भीली भाषा — शारदा विद्या मंदिर में भारतीय भाषा दिवस मनाया गया

झाबुआ – भारतीय भाषा दिवस के अवसर पर शारदा विद्या मंदिर में “म्हारी बोली म्हारो वट” शीर्षक से भीली भाषा के संरक्षण और संवर्धन को समर्पित गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। विद्यार्थियों ने भीली भाषा में स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिवादन किया तथा भाषा संरक्षण पर आधारित आकर्षक लघु नाटिका भी मंचित की।

संस्था के संचालक श्री ओम शर्मा ने प्रस्तावना देते हुए कहा कि भारतीय भाषाएँ हमारी सांस्कृतिक पहचान की आधारशिला हैं और स्थानीय मातृभाषाएँ समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि भाषाई गौरव बनाए रखना समय की आवश्यकता है।

इसके बाद श्री सुरभान सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भीली भाषा में अपार साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत समाहित है, जिसे सुरक्षित रखना आने वाली पीढ़ियों के लिए अनिवार्य है।

भाजपा जिला अध्यक्ष श्री भानु भूरिया ने “म्हारी बोली” को केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी अस्मिता का प्रतीक बताते हुए विद्यालय के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने शिक्षा जागरूकता पर केंद्रित भीली भाषा में अपनी प्रस्तुति देकर माहौल को ऊर्जा से भर दिया।

कार्यक्रम की मुख्य आकर्षण रहीं रंगकर्मी एवं समाजसेविका श्रीमती अनु भाबर, जिन्होंने भीली भाषा में अपने प्रभावी उद्बोधन और स्वरचित गीत के माध्यम से उपस्थित जनों को भाव-विभोर कर दिया।

 

कन्या महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अंजना मुवेल ने भारतीय भाषा दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी भाषाई विविधता है और हर भाषा अपने आप में एक सांस्कृतिक धरोहर है।

 

कार्यक्रम में भीली भाषा के संरक्षण और प्रसार में उत्कृष्ट कार्य करने वाले दो विशिष्ट व्यक्तित्वों—

• श्री मुकेश परमार, जो भीली भाषा में समाचार प्रस्तुत करते हैं

• श्रीमती अनु भाबर, प्रसिद्ध रंगकर्मी, लेखिका एवं समाजसेविका

—का शाल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह के साथ सम्मान किया गया।

 

इस अवसर पर श्री कल्याण डामोर ने उपस्थित सभी लोगों को भीली भाषा के संरक्षण और संवर्धन की शपथ दिलाई। कार्यक्रम में शैलेश दुबे, हरु भूरिया, बहादुर हटीला सहित अनेक जनप्रतिनिधि, शिक्षक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

 

कार्यक्रम का संचालन शिक्षक रोहित डाबर ने किया तथा अंत में संचालक अथर्व शर्मा ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

 

यह आयोजन न केवल भाषा के प्रति सम्मान का प्रतीक रहा, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपरा को सहेजने की प्रेरणा भी देता दिखाई दिया।

Tahalka Bharat
Author: Tahalka Bharat

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