श्रद्धा का केंद्र, सुरक्षा पर सवाल : बैद्यनाथ महादेव मंदिर की हालत चिंताजनक
बदनावर – रिपोटर…Tahalkabharat.com
धार जिले के बदनावर नगर के प्रवेश क्षेत्र में स्थित बैद्यनाथ महादेव मंदिर—जिसे बैजनाथ महादेव और उड़िया मंदिर के नाम से भी जाना जाता है—क्षेत्र की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक है। लगभग 1500 वर्ष पुराना यह प्राचीन शिवालय आज जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है, जिससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं।
इतिहासकारों के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण छठी शताब्दी में उड़िया अथवा भूमिज स्थापत्य शैली में उड़िसा से आए कारीगरों द्वारा किया गया था। इसे परमार काल से भी जोड़ा जाता है, जिससे इसका ऐतिहासिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है। वर्ष 1984 से यह मंदिर पुरातत्व विभाग के संरक्षण में शामिल है, लेकिन इसके बावजूद समय और मौसम के प्रभाव से मंदिर की संरचना में लगातार क्षरण देखा जा रहा है।
करीब 64 फीट ऊंचे इस शिवालय के वेदीबंध, जंघा और शिखर भाग पर आज भी बारीक नक्काशी और देव प्रतिमाएं इसकी प्राचीन भव्यता की झलक देती हैं। हालांकि कई स्थानों पर पत्थर कमजोर हो चुके हैं और उनके गिरने का खतरा बना हुआ है। मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह स्थिति किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकती है।
मंदिर के पुजारी पंडित ओंकार पुरी गोस्वामी का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का कार्य नहीं किया गया, तो टूटे हुए पत्थर किसी श्रद्धालु को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने प्रशासन और पुरातत्व विभाग से शीघ्र ध्यान देने की अपील की है।
धार्मिक आस्था की दृष्टि से बैद्यनाथ महादेव मंदिर बदनावर का प्रमुख केंद्र है। सावन माह और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि शिवलिंग के दर्शन से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ऐसे में मंदिर की वर्तमान स्थिति आस्था और सुरक्षा—दोनों के लिए चुनौती बन गई है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह स्थल केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर भी है। उनका मानना है कि प्रशासन और पुरातत्व विभाग को मंदिर की स्थिति का तकनीकी परीक्षण कर शीघ्र संरक्षण और मरम्मत कार्य शुरू करना चाहिए, ताकि इस ऐतिहासिक धरोहर की प्राचीन गरिमा बनी रहे और श्रद्धालु सुरक्षित वातावरण में पूजा कर सकें।










