भोपाल से विशेष रिपोर्ट
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का संबोधन
भोपाल। राजधानी में आयोजित एक विशेष शैक्षिक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा व्यवस्था, नई शिक्षा नीति और मध्यप्रदेश में हो रहे शैक्षिक सुधारों पर विस्तार से अपने विचार रखे। दोनों नेताओं ने भारतीय शिक्षा की जड़ें, वर्तमान उपलब्धियाँ और भविष्य की दिशा पर महत्वपूर्ण संदेश दिए।
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा— “शिक्षा से ही भारत की पहचान”
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भारतीय शिक्षा परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश ने शिक्षा नीति को सबसे पहले प्रभावी रूप से लागू किया। उन्होंने बताया कि—
मध्यप्रदेश ने कुलपति को ‘कुलगुरु’ बनाने की पहल कर शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान बनाई।
उन्होंने रामायण और महाभारत काल के उदाहरण देते हुए कहा कि गुरु विश्वामित्र ने भगवान राम और लक्ष्मण को शिक्षा दी, जहाँ से उन्होंने चुनौतियाँ स्वीकार कर अपना जीवन महान बनाया।
भगवान कृष्ण द्वारा संदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने का भी उन्होंने विशेष उल्लेख किया।
विक्रमादित्य और राजा भोज के शासनकाल का उदाहरण देकर बताया कि ज्ञान, सुशासन और जल प्रबंधन भारतीय परंपरा के महत्वपूर्ण स्तंभ रहे हैं।
उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि “पहले केवल कागज़ की डिग्री देकर बच्चों का भविष्य खराब किया गया।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भारत हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और मध्यप्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है।
प्रदेश में 55 नए एक्सीलेंस कॉलेज खोले गए, जो नई पीढ़ी को उच्च गुणवत्ता वाला शिक्षा वातावरण प्रदान करेंगे।
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केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान बोले— “भारतीय शिक्षा नीति, भारतीय आत्मा का दस्तावेज़”
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि नई शिक्षा नीति पूरी तरह भारतीय सभ्यता, संस्कृति और वैज्ञानिकता पर आधारित है। उन्होंने कहा—
मैकाले ने अंग्रेजी शासन को मजबूत करने के लिए भारतीय शिक्षा पर प्रहार किया था, लेकिन आज भारत अपनी मूल शिक्षा दर्शन की ओर लौट रहा है।
पूरे देश में 30 करोड़ विद्यार्थी हैं, जिसमें से मध्यप्रदेश में 1 करोड़ 35 लाख स्कूल शिक्षा के बच्चे और 1 करोड़ 27 लाख विद्यार्थी उच्च शिक्षा में हैं।
उन्होंने कहा कि “करीब 2.5 करोड़ विद्यार्थी स्कूल और कॉलेज में हैं—मध्यप्रदेश एक जीवंत शिक्षा प्रयोगशाला (Live Laboratory) की तरह काम कर रहा है।”
NCERT के साथ मिलकर बालवाटिका से कक्षा 8 तक एक समान सिलेबस तैयार किया गया है, जो पूरे देश में बड़ा बदलाव लाएगा।
विज्ञान शिक्षा में मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय काम किया है, परंतु अभी भी चुनौती यह है कि
60% बच्चे औसत स्तर पर हैं
40% बच्चों को और बेहतर शिक्षा सहायता की जरूरत है
प्रधान ने कहा कि यह स्थिति बदल रही है और जल्द ही मध्यप्रदेश देश की अग्रणी शैक्षिक शक्ति के रूप में स्थापित होगा।
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निष्कर्ष
मुख्यमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के संबोधनों ने साफ किया कि मध्यप्रदेश नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में देश का अग्रणी राज्य बन चुका है।
शिक्षा व्यवस्था को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों, वैज्ञानिक सोच और आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने की दिशा में बड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
यह कार्यक्रम न केवल मध्यप्रदेश के शैक्षिक विकास की दिशा तय करता है, बल्कि आने वाले वर्षों में विद्यार्थियों के भविष्य को भी नई रोशनी देगा।










