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​”रेत माफिया सिंडिकेट की चांदी, सरकार को चपत? मध्य प्रदेश में खनन खेल पर हाईकोर्ट सख्त!”

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MP – सीहोर रेत खनन विवाद : हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब…

भोपाल, मध्य प्रदेश…09340168252.! 

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में रेत खनन के ठेकों और अवैध उत्खनन को लेकर कानूनी सरगर्मी तेज हो गई है। माननीय उच्च न्यायालय में दायर याचिका (W.P. No. 42354/2025 – राजेश चौहान बनाम मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य) पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

मामले की मुख्य बातें:

इस याचिका में मुख्य रूप से दो गंभीर आरोप लगाए गए हैं:

राजस्व की हानि : याचिकाकर्ता का आरोप है कि सीहोर जिले में रेत खनन के अधिकार एक निजी प्रतिवादी (प्रतिवादी संख्या 5) को पिछले वर्ष की तुलना में कम बोली (Bid) पर आवंटित कर दिए गए हैं। इससे सरकारी खजाने को वित्तीय नुकसान होने की आशंका जताई गई है।

अवैध उत्खनन : याचिका में यह भी कहा गया है कि संबंधित निजी पक्ष द्वारा निर्धारित सीमाओं का उल्लंघन कर अवैध खनन किया जा रहा है। याचिकाकर्ता का दावा है कि इस संबंध में पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

न्यायालय की कार्यवाही और सरकारी निर्देश

9 जनवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान, उच्च न्यायालय ने राज्य के वकील को इस मामले में अपना पक्ष (Response) रखने का निर्देश दिया है।

इस आदेश के बाद, अतिरिक्त महाधिवक्ता (Addl. Advocate General) ब्रह्मदत्त सिंह ने खनिज विभाग के सचिव और संबंधित अधिकारियों को पत्र जारी कर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

OIC की नियुक्ति: मामले की गंभीरता को देखते हुए, विभाग को तत्काल एक प्रभारी अधिकारी (Officer-in-Charge – OIC) नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

समय सीमा: न्यायालय के किसी भी प्रतिकूल आदेश (Adverse Order) से बचने के लिए जल्द से जल्द जवाब दाखिल करना अनिवार्य है।

संबंधित विभाग और अधिकारी:

इस मामले में मुख्य रूप से निम्नलिखित पक्षों को जवाबदेह बनाया गया है:

सचिव, खनिज विभाग (मध्य प्रदेश शासन)

  कलेक्टर, जिला सीहोर

  जिला खनिज अधिकारी, सीहोर

 तहसीलदार, बुधनी

निष्कर्ष

यह मामला न केवल पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़ा है, बल्कि सरकारी नीलामी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता पर भी सवाल उठाता है। अब सबकी नजरें राज्य सरकार द्वारा दाखिल किए जाने वाले जवाब और उच्च न्यायालय के अगले आदेश पर टिकी हैं।

नोट : इस मामले को प्रशासन द्वारा “अत्यंत महत्वपूर्ण” (Most Urgent) श्रेणी में रखा गया है।

 

Tahalka Bharat
Author: Tahalka Bharat

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