भागीरथपुरा में दूषित पानी का कहर जारी, 32वीं मौत से हड़कंप
इंदौर।
इंदौर की भागीरथपुरा बस्ती में दूषित पानी से फैल रही बीमारी का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक महीना बीत जाने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। रविवार को बस्ती में 32वीं मौत दर्ज होने से इलाके में दहशत का माहौल और गहरा हो गया है।
ताज़ा मामला 65 वर्षीय अनिता कुशवाह का है, जिनकी इलाज के दौरान अस्पताल में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वे पिछले कई दिनों से दूषित पानी से फैलने वाली बीमारी से पीड़ित थीं और उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। परिजनों के अनुसार, समय पर प्रभावी इलाज और साफ पेयजल की व्यवस्था न होने से उनकी जान चली गई।
भागीरथपुरा बस्ती में बीते एक महीने से उल्टी-दस्त, बुखार और पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन को बार-बार शिकायत करने के बावजूद न तो शुद्ध पेयजल की स्थायी व्यवस्था की गई और न ही दूषित पानी की आपूर्ति पूरी तरह रोकी गई।
इलाके के रहवासियों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि मौतों का यह सिलसिला प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार सर्वे और उपचार का दावा कर रही हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे अलग नज़र आ रही है।
32वीं मौत के बाद अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर कब तक भागीरथपुरा के लोग दूषित पानी की कीमत अपनी जान देकर चुकाते रहेंगे।
इंदौर की भागीरथपुरा बस्ती में दूषित पानी से हुई 32 मौतों को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर सीधा हमला बोला है। पार्टी ने इन मौतों को “सरकारी-हत्याएं” करार देते हुए कहा है कि यह लापरवाही नहीं, बल्कि 25 साल की विफल और संवेदनहीन व्यवस्था का नतीजा है।
कांग्रेस ने घोषणा की है कि 03 फरवरी (कल) वह सड़कों पर उतरकर जनता की आवाज बनेगी और जल में मिले ज़हर के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराएगी। पार्टी का कहना है कि एक महीने बाद भी न तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई हुई, न ही पीड़ितों को न्याय मिला।
कांग्रेस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस आंदोलन में शामिल होकर सरकार को जगाएं और सुरक्षित पेयजल को अपना अधिकार










