राजधानी की नाक के नीचे धधकी फैक्ट्री : ISBT के पास ‘अग्नि तांडव’, सिस्टम की सुस्ती पर सुलगते सवाल
भोपाल। रविवार की दोपहर जब पूरा शहर सुस्ता रहा था, तब ISBT (इंटर स्टेट बस टर्मिनल) के ठीक सामने स्थित मेहता इंडस्ट्रीज आग की लपटों से कराह रही थी। दोपहर करीब पौने 4 बजे लगी इस भीषण आग ने न केवल फैब्रिकेशन फैक्ट्री के पिछले हिस्से को अपनी चपेट में लिया, बल्कि प्रशासन के दावों को भी झुलसा दिया।
धुएं का गुबार और ‘दम तोड़ता’ सुरक्षा तंत्र
आग उस गोदाम में लगी जहां भारी मात्रा में लकड़ी और प्लाईवुड का स्टॉक जमा था। चंद मिनटों में लपटें इतनी विकराल हो गईं कि आसमान काले धुएं से पट गया। हैरानी की बात यह है कि इस संवेदनशील इलाके में आग पर काबू पाने के लिए नगर निगम को एक-दो नहीं, बल्कि 12 दमकलें झोंकनी पड़ीं।
क्या हम किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहे हैं?
फैक्ट्री की बनावट: आग बुझाने के लिए दमकलकर्मियों को टीन की दीवारें तोड़नी पड़ीं। क्या फैक्ट्री का निर्माण सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर किया गया था?
बस्ती पर मंडराता खतरा: फैक्ट्री से बिल्कुल सटी झुग्गी बस्ती में भगदड़ मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए गृहस्थी का सामान सड़क पर लेकर दौड़ने लगे। अगर हवा का रुख जरा भी बदलता, तो दर्जनों परिवार राख हो सकते थे।
दो घंटे का ‘रेस्क्यू’ या अव्यवस्था का नमूना?
करीब दो घंटे की मशक्कत और फोम के इस्तेमाल के बाद आग पर काबू तो पा लिया गया, लेकिन पीछे छोड़ गया कई अनुत्तरित सवाल। हालांकि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, जिसे महज ‘किस्मत’ कहा जा सकता है, ‘इंतजाम’ नहीं।
कड़वा सच: फिलहाल आग लगने का कारण ‘अज्ञात’ बताया जा रहा है। पर सवाल यह है कि क्या हर बार की तरह जांच के नाम पर खानापूर्ति होगी, या घनी आबादी के बीच चल रही ऐसी फैक्ट्रियों के फायर ऑडिट की जहमत उठाई जाएगी?










