‘होर्मुज’ की घेराबंदी से भारत में तेल संकट की आहट, राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर साधा निशाना

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़ा भीषण युद्ध अब भारत की आर्थिक रगों यानी ‘तेल सप्लाई’ के लिए बड़ा खतरा बन गया है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किए जाने की चेतावनी के बाद देश में ऊर्जा संकट की आशंका गहरा गई है। इस संवेदनशील मुद्दे पर अब सियासत भी गरमा गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘चुप्पी’ पर सवाल उठाते हुए इसे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का सरेंडर करार दिया है।
तबाही के मुहाने पर ईरान
ईरान में इजरायली और अमेरिकी हमलों ने भारी तबाही मचाई है। खबरों के मुताबिक, अब तक करीब 1,145 लोग इस युद्ध की भेंट चढ़ चुके हैं, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई समेत कई शीर्ष सैन्य कमांडर और मंत्री शामिल हैं। पलटवार में ईरान ने भी इजरायल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है, जिसमें 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत की पुष्टि हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस युद्ध के एक महीने तक खिंचने की आशंका जताई है, जिसने वैश्विक बाजारों में हड़कंप मचा दिया है।
क्यो अटकी है भारत की सांसें?
राहुल गांधी ने भारत की तेल सप्लाई को लेकर जो चिंता जताई है, उसके पीछे ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ की भौगोलिक स्थिति सबसे बड़ा कारण है।
- सप्लाई लाइन पर खतरा: भारत अपनी जरूरत का 40% से अधिक कच्चा तेल इसी रास्ते से आयात करता है।
- एलपीजी और एलएनजी संकट: रसोई गैस (LPG) और प्राकृतिक गैस (LNG) के लिए स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि इनका बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर आता है।
- ईरान की चेतावनी: ईरानी सेना ने साफ कहा है कि इस रास्ते से गुजरने वाले किसी भी जहाज को निशाना बनाया जा सकता है।
राहुल गांधी का तीखा हमला: “प्रधानमंत्री ने कर दिया सरेंडर”
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए केंद्र सरकार की विदेश नीति और रणनीतिक तैयारी को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने लिखा:
“दुनिया एक अस्थिर दौर में है और तूफान का खतरा मंडरा रहा है। हमारे पड़ोस (हिंद महासागर) तक युद्ध पहुँच चुका है, ईरानी युद्धपोत मार गिराया गया है, लेकिन प्रधानमंत्री खामोश हैं। भारत को एक स्थिर नेतृत्व की जरूरत है, न कि ऐसे प्रधानमंत्री की जो समझौतावादी हो और जिसने हमारी रणनीतिक स्वायत्तता को सरेंडर कर दिया हो।”
क्या भारत के पास है ‘प्लान बी’?
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत के पास वर्तमान में लगभग 25 दिनों का कच्चे और परिष्कृत तेल का भंडार (Strategic Petroleum Reserves) मौजूद है। यदि युद्ध लंबा खिंचता है और होर्मुज का रास्ता बंद रहता है, तो भारत में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आना तय है, जिसका सीधा असर महंगाई और आम जनता की जेब पर पड़ेगा।
ईरान-इजरायल युद्ध महज एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए ‘अलार्म बेल’ है। विपक्षी खेमे के आरोपों के बीच अब सबकी निगाहें केंद्र सरकार के अगले कदम और विदेश मंत्रालय की रणनीति पर टिकी हैं।










