धार भोजशाला में ‘शुद्धिकरण’ का नया दौर: ASI की नई गाइडलाइन आते ही थमा इंतजार, हिंदू संगठनों ने किया शंखनाद
धार। सालों के इंतजार, अदालती दांव-पेंच और तीखी बहसों के बीच धार की ऐतिहासिक भोजशाला में आखिरकार एक नया अध्याय शुरू हो गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की नई गाइडलाइन लागू होते ही हिंदू समाज और भोज उत्सव समिति ने बिना एक पल गंवाए भोजशाला पर अपना दावा और अधिकार मुखर कर दिया। रविवार को सूर्योदय की पहली किरण के साथ ही पूरा परिसर मंत्रोच्चार और शंखनाद से गूंज उठा, जिससे यह साफ संदेश दे दिया गया कि अब यहां का माहौल बदल चुका है।
गंगाजल से ‘शुद्धिकरण’ और सीधे गर्भगृह पर फोकस…
रविवार सुबह जैसे ही द्वार खुले, बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां वाग्देवी के चित्र हाथों में थामे एक हुजूम के रूप में भोजशाला में दाखिल हुए। समिति ने सबसे पहला और कड़ा कदम उठाते हुए पूरे परिसर को गंगाजल और गोमूत्र से धोकर ‘शुद्ध’ किया। यह कदम सीधे तौर पर पिछले गतिरोधों को कड़ा जवाब था। इसके तुरंत बाद सीधे गर्भगृह को निशाने पर लिया गया—उसे रंगोली से सजाया गया और परिसर के बाहर जल रही ज्योति मंदिर की अखंड ज्योत को पूरे दमखम के साथ गर्भगृह के भीतर स्थापित कर दिया गया।
सूर्योदय से अनुष्ठान, 11:45 पर महाआरती
हिंदू संगठनों ने नई गाइडलाइन के पहले ही दिन अपनी पूरी ताकत और आस्था का प्रदर्शन किया।
सुबह (सूर्योदय) : वास्तु पूजन, देवी अनुष्ठान और वेदमंत्रों का तीखा पाठ शुरू हुआ, जिसने परिसर के कोने-कोने को हिलाकर रख दिया।
दुपहर (11:45 बजे) : सैकड़ों कंठों से एक साथ मां वाग्देवी की महाआरती की गई, जिसने यह स्पष्ट कर दिया कि अब यह परंपरा थपने वाली नहीं है।
सीधा संदेश : ASI की इस नई व्यवस्था ने भोजशाला के भीतर की शक्ति और समीकरणों को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। हिंदू समाज ने पहले ही दिन जिस आक्रामक और विधिवत तरीके से पूजा-अर्चना की शुरुआत की है, उससे साफ है कि अब यहां किसी भी तरह के ढुलमुल रवैए के लिए कोई जगह नहीं बची है। यह शुरुआत आने वाले दिनों में धार की राजनीति और धार्मिक दावों को एक नई और तीखी दिशा देने वा
ली है।









