Search
Close this search box.

​”मंत्रियों की मनमर्जी या प्रशासनिक अनुशासन? MP की नई तबादला नीति पर बुधवार को कैबिनेट का ‘लिटमस टेस्ट’!”

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

कैबिनेट में आएगा नई तबादला नीति का ड्राफ्ट : मंत्रियों की ‘सिफारिश’ और अफसरों की ‘कसरत’ के बीच मोहन यादव सरकार का बड़ा फैसला जल्द

भोपाल। मध्य प्रदेश में प्रशासनिक फेरबदल और तबादलों का इंतजार कर रहे अधिकारी-कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर है। डॉ. मोहन यादव सरकार की वर्ष 2026 की नई तबादला नीति को आगामी बुधवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिल सकती है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने नीति का अंतिम ड्राफ्ट तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय को सौंप दिया है।

अब गेंद मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के पाले में है। इस ड्राफ्ट पर दोनों की अंतिम चर्चा के बाद इसे कैबिनेट के पटल पर रखा जाएगा, जहां मंत्रियों की हरी झंडी मिलते ही सामान्य प्रशासन विभाग इसके आदेश जारी कर देगा।

 ‘स्वैच्छिक’ तबादलों पर रार: क्या मंत्रियों के दबाव में झुकेगी सरकार?

सूत्रों की मानें तो इस बार की तबादला नीति में स्वैच्छिक (Voluntary) और प्रशासनिक (Administrative) तबादलों के लिए अलग-अलग सीमाएं (Limit) तय करने का प्रस्ताव है। लेकिन सरकार के भीतर ही इसे लेकर खींचतान शुरू हो चुकी है।

मंत्री की मांग पर फंसा पेंच : बीते 11 मई को हुई कैबिनेट बैठक में कद्दावर मंत्री विजय शाह ने खुले तौर पर मुख्यमंत्री से मांग की थी कि ‘स्वैच्छिक तबादलों’ पर कोई लिमिट न रखी जाए। सरल शब्दों में कहें तो, नेताजी चाहते हैं कि उनके चहेतों के तबादलों पर कोई बंदिश न हो। हालांकि, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पर ‘विचार करने’ का आश्वासन देकर मामला शांत कराया था, लेकिन देखना यह होगा कि नई नीति में मंत्रियों की इस ‘मनमर्जी’ को जगह मिलती है या प्रशासनिक अनुशासन हावी रहता है।

 

बैठकों के दौर में उलझी कैबिनेट, टल गई थी तारीख

गौरतलब है कि यह तबादला नीति सोमवार (18 मई) को ही कैबिनेट में आने वाली थी। लेकिन सरकार की प्राथमिकताएं अचानक बदल गईं। मंत्रियों की परफॉर्मेंस रिव्यू मीटिंग (कामकाज की समीक्षा) और निगम-मंडल के अध्यक्ष-उपाध्यक्षों की ट्रेनिंग के चलते सोमवार की बैठक को टालना पड़ा।

अब अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि बुधवार की बैठक में हर हाल में नीति का प्रस्ताव टेबल किया जाए।

नई तबादला नीति की 3 बड़ी बातें (प्रस्तावित)

दोहरी नीति : स्वैच्छिक और प्रशासनिक तबादलों के लिए अलग-अलग कोटे और नियम तय हो सकते हैं।

सीमित समय: ट्रांसफर से बैन हटने की अवधि बेहद सीमित रखी जा सकती है ताकि सरकारी कामकाज प्रभावित न हो।

परफॉर्मेंस का दबाव: परफॉर्मेंस रिव्यू के ठीक बाद आ रही इस नीति में ढीले-ढाले अफसरों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।

अब देखना यह है कि बुधवार को कैबिनेट मंत्रियों की ‘पसंद’ पर मुहर लगाती है या फिर प्रशासनिक कसावट के लिए कोई कड़ा फैसला लेती है।

Tahalka Bharat
Author: Tahalka Bharat

Leave a Comment

और पढ़ें