भोपाल |
उपमुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ला ने कैबिनेट बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार ने सिंचाई, शिक्षा, ऊर्जा, आबकारी नीति और किसानों के हित में कई अहम निर्णय लिए हैं, जिनसे प्रदेश के विकास को नई गति मिलेगी।
सिंचाई परियोजनाओं को बड़ी मंजूरी
कैबिनेट ने राजगढ़ जिले की सहारनपुर तहसील की सिंचाई परियोजना को 600 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। इस परियोजना से 11,022 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।
इसके अलावा सुल्तानपुर सिंचाई परियोजना को 115 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है, जिससे 5,700 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा।
बरेली क्षेत्र में भी 386 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है, जिसके तहत करीब 15,000 कार्यों में पानी की सुविधा और सिंचाई कार्य किए जाएंगे। इन परियोजनाओं से लगभग 20,000 किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में फैसले
कैबिनेट ने 322 करोड़ रुपये शिक्षकों की क्रमोन्नति पर खर्च करने की मंजूरी दी है। इससे प्रदेश के सवा तीन लाख शिक्षकों को प्रतिमाह 3,000 से 5,000 रुपये तक का लाभ मिलेगा।
इसके साथ ही सांदीपनी स्कूलों के लिए करीब 17 से 18 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
एएसआई रामशरण गौतम को एक करोड़ रुपये की सहायता राशि देने का निर्णय भी लिया गया।
परिवहन और ऊर्जा से जुड़े निर्णय
ग्वालियर और उज्जैन में आयोजित वाहन मेलों में नागरिकों को 50 प्रतिशत तक की रियायत दी जाएगी।
कैबिनेट ने मध्यप्रदेश सोलर नीति को भी मंजूरी दी है। इसके तहत 4 घंटे के लिए 300 मेगावाट और 6 घंटे की अवधि वाली सोलर योजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इससे लोएस्ट टैरिफ पर बिजली उपलब्ध होगी और उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।
नई आबकारी नीति 2025-26 को मंजूरी
कैबिनेट ने वर्ष 2025-26 के लिए नई आबकारी नीति को मंजूरी दे दी है। इस नीति का उद्देश्य धार्मिक स्थलों की गरिमा बनाए रखना, सामाजिक संतुलन कायम करना और राजस्व में वृद्धि करना है।
आबकारी नीति की प्रमुख विशेषताएं
19 धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों (उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर, मैहर, चित्रकूट, ओरछा, दतिया, अमरकंटक सहित) पर शराब की दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी।
स्कूल, कॉलेज, मंदिर और अन्य संवेदनशील स्थलों से शराब दुकानों की दूरी 75 मीटर से बढ़ाकर 150 मीटर कर दी गई है।
रेस्टोरेंट में केवल बीयर, वाइन और 10% तक अल्कोहल वाले पेय परोसने के लिए ‘लो-अल्कोहल बार’ की नई श्रेणी शुरू की गई है।
सभी शराब दुकानों पर POS मशीन अनिवार्य की गई है। बिना POS के बिक्री पर जुर्माना और लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है।
शराब दुकानों के आवंटन मूल्य में 20% तक वृद्धि का प्रावधान किया गया है, जो 1 अप्रैल 2025 से लागू होगा।
आदिवासी समूहों द्वारा बनाई जाने वाली महुआ से बनी हेरिटेज शराब को VAT से छूट जारी रहेगी और इसकी एयरपोर्ट पर बिक्री की भी अनुमति होगी।
प्रदेश में फलों और शहद से बनने वाली वाइन को बढ़ावा देने के लिए वाइनरी परिसर में ‘वाइन टैवर्न’ खोलने की अनुमति दी गई है।
नीति का उद्देश्य
नई आबकारी नीति का लक्ष्य धार्मिक स्थलों के आसपास शराब बिक्री रोककर सामाजिक सद्भाव बनाए रखना, राजस्व में वृद्धि करना और लो-अल्कोहल उत्पादों व वाइन उद्योग को प्रोत्साहित करना है।
इन फैसलों के माध्यम से राज्य सरकार ने किसानों, शिक्षकों, उपभोक्ताओं और समाज के सभी वर्गों को ध्यान में रखते हुए संतुलित और विकासोन्मुखी कदम उठाए हैं।










